जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है देश के कई राज्यों में पानी संकट गहराता जा रहा है। ताजा खबर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से आई जहां पानी संकट गहरा गया है। वैसे तो पानी के संकट से देश के कई राज्य जूझ रहे हैं लेकिन शिमला में पानी के त्राहिमाम की खबर मीडिया में इसलिए छाई क्योंकि हिमाचल कई राज्यों को पानी सप्लाई करता है साथ ही विदेशी सैलानी यहां बड़ी तादाद में आते हैं।
हमारे देश भारत में ऐसे क्षेत्र और राज्य हैं, जहां सूखा और पानी की कमी के चलते हर दिन धरना प्रदर्शन से लेकर पानी को लेकर लड़ाई झगड़े की खबर आती रही है। बुंदेलखंड, उड़ीसा, बंगलूरू, हरियाणा सहित दिल्ली भी पानी की समस्या से जूझ रहा है। यही नहीं हाल के वर्षों में जल संकट कई और राज्यों में फैला है। देश की राजधानी दिल्ली सहित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश ऐसे प्रमुख सूबे हैं, जहां तेजी से पानी की समस्या सिर उठा रही है।
जिस तरह से देश के जलाशयों से पानी सूख रहा है और इससे लग रहा है कि आने वाले समय में पानी का यह संकट और गहराने जा रहा है। सरकारी आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो देश के 91 जलाशयों में अब महज 20 फीसदी पानी बचा है और उनमें से 77 में जलस्तर 40 फीसदी या उससे भी कम बचा है।
आंकड़े बताते हैं गहराता जल संकट इनसानी गलतियों का नतीजा है। जल संरक्षण में जुटे जानकारों की मानें तो अगर सरकार और जनता जल्दी नहीं चेती तो वह दिन दूर नहीं जब देश के कई राज्य जीरो डे बन जाएंगे। अब सवाल उठता है कि जीरो डे क्या होता है तो बताते चलें कि यह उन दिनों को कहते हैं जब शहरों में जलसंकट की वजह से पानी की आपूर्ति बंद कर दी जाती है। लोगों को राशन की तर्ज पर एक निश्चित मात्रा में ही पानी का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाती है।
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पानी की समस्या
दिल्ली
दिल्ली में पीने के पानी का सबसे बड़ा स्रोत यमुना नदी है लेकिन इनसानी लालच और यमुना क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण की वजह से 40 फीसदी यमुना का बाढ़ क्षेत्र खत्म हो गया जबकि 87 फीसदी दिल्ली भूजलस्तर के अतिदोहन की वहज से लगातार गिर रहा है।
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पानी का संकट
बंगलूरू
बंगलूरू में पानी का संकट गहरा रहा है। 1973 के मुकाबले यहां के 79 फीसदी जलस्रोत खत्म हो गए हैं।
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पानी की समस्या
मुंबई- आंकड़े बताते हैं कि मुंबईकर हर दिन 90 करोड़ लीटर पानी बर्बाद कर देते हैं वैसे पानी बर्बाद करने में दिल्ली वासी भी पीछे नहीं है। मुंबई में हर वर्ष 300 सेमी से ज्यादा बारिश होने के बावजूद पानी को जमा करने का न तो सरकार ने ही कोई कारगर उपाय बनाया है और न ही जनता वाटर हार्वेस्टिंग पर ध्यान दे रही है। महाराष्ट्र में जल संकट इतना गहरा गया था कि 2017 में सूखे की वजह से लातूर में ट्रेन से पानी पहुंचाना पड़ा था जबकि 2016 में सोलापुर के जलस्रोत को पेयजल के लिए आरक्षित किया गया था
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WATER-CRISIS
गुरुग्राम - पिछले 60 सालों में पानी का स्तर तेजी से घटा है। 1950 के दशक में जहां 600 तालाब थे जो अब 2017-18 तक महज 40 रह गए हैं। भूजलस्तर 40 मीटर से नीचे चला गया है चौंकाने वाली बात ये है कि यह 1974 में छह मीटर पर था।
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water crisis
उत्तर प्रदेश में भी पानी का स्तर तेजी से घट रहा है। कई बड़ी नदियां इस प्रदेश से गुजर रही हैं लेकिन इसके बावजूद कानपुर, लखनऊ से लेकर उत्तर प्रदेश के कई शहर भारी जलसंकट से गुजर रहे हैं। यही नहीं पानी के विभिन्न स्रोतों के बंद होने और चमड़ा उद्योग से भूमिगत जल का प्रदूषित होना इसका प्रमुख कारण है।
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कहीं टंकियां खाली तो कहीं नलकूप व टीटीएसपी बंद
- फोटो : अमर उजाला
नैनीताल
तालों का शहर कहे जाने वाले नैनीताल में पानी का संकट गहरा गया है। यहां कई इलाकों में पानी की सप्लाई महज 2 से तीन घंटे ही की जा रही है। बढ़ते प्रदूषण की वजह से नैनी झील लगातार सिकुड़ रही है जबकि वर्षा जल के संचय की व्यवस्था नहीं की गई है।
सरकार ने किया ये इंतजाम
मुंबई नगर निगम ने 500 वर्गफीट से अधिक क्षेत्र में बने भवन में वर्षा जल संचय अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है जो अभी तक पूरी सोसाइटी में लागू नहीं किया जा सका है जबकि चेन्नई में पहले ही बड़ी इमारतों में वर्षा का पानी जमा करने का कानून है। दिल्ली में शीला सरकार के दौरान यह प्रस्ताव जारी करने की कोशिश की थी लेकिन अभी तक उसपर कोई कारगर कदम उठता दिखाई नहीं दे रहा है।