आम्रपाली समूह को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की लगातार अनदेखी भारी पड़ गई है। नाराज सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कंपनी के ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल समेत कई संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया। साथ ही समूह के निदेशकों से कारण बताने के लिए कहा कि उन्हें न्यायालय की अवमानना की सजा क्यों नहीं दी जाए? शीर्ष अदालत ने समूह को दो हफ्ते में यह भी बताने के लिए कहा है कि किन कंपनियों में उसने अपने फंड डायवर्ट किए हैं।
शीर्ष अदालत ने समूह के निदेशकों से कहा, क्यों नहीं आपको अवमानना की सजा दी जाए
जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की पीठ ने मंगलवार को कहा, प्रथम दृष्टया हमें लगता है कि इस पूरे मामले में आपने गंभीर धोखाधड़ी की है। अब तक आए तथ्यों और प्रमाणों से साफ है कि आम्रपाली समूह ने फ्लैट खरीदारों के पैसे से न तो फ्लैट बनाए और न ही प्राधिकरण को रकम दी। इस रकम को नई-नई कंपनियां खोलकर डायवर्ट किया गया। पीठ ने कहा कि आप जानबूझ कर तथ्यों को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। आप हमें गोल-गोल घूमा रहे हैं और परेशानी में पड़ सकते हैं।
दो सप्ताह में जवाब देने को कहा कि किन कंपनियों में डायवर्ट किए हैं अपने फंड
इससे पहले सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि आम्रपाली समूह की कंपनियां और उसके निदेशकों ने फर्जी कंपनियां बनाई ताकि रकम डायवर्ट की जा सके। यहां तक कि रॉ मैटेरियल के लिए भी कंपनी बनाई गई और उसमें फंड डायवर्ट किए। इस कंपनी को बनाने का मकसद रसीद का जुगाड़ करना था। पीठ ने समूह के प्रमोटर अनिल शर्मा और दो निदेशकों को संपत्तियों और अपने पास मौजूद फंड का ब्योरा देने के लिए कहा है।
हजारों-लाखों पन्ने नहीं सही जानकारी दीजिए
पीठ ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिटर्स का कहना है कि अब तक उन्हें समूह द्वारा पूरी जानकारी नहीं दी गई है। यह गंभीर मामला है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। आपने 800 पन्नों का दस्तावेज दिया है, लेकिन इसमें जानकारी नहीं है। फोरेंसिक ऑडिटर इस तरह के हजारों व लाखों पन्नों को नहीं देख सकते। ये बताइए कि आपके पास कितनी कारें हैं और उनकी कीमत कितनी है। इस पर समूह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गीता लूथरा ने समय मांगा, लेकिन पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि आपको पहले ही बहुत वक्त दिया जा चुका है।
सीएफओ-ऑडिटर पर भी कसा शिकंजा
आम्रपाली समूह की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश देने के दौरान मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उसके चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) और ऑडिटर पर भी शिकंजा कस दिया। जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस यूयू ललित की पीठ ने सीएफओ चंदर वाधवा की कंपनी के खाते में पड़े 11 करोड़ रुपये और ऑडिटर अनिल मित्तल की कंपनी के खाते में पड़े 47 लाख रुपये सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा कराए जाने का आदेश जारी कर दिया। पीठ ने पाया कि सीएफओ और ऑडिटर को ये रकम आम्रपाली समूह ने ही दी थी। पीठ ने कहा कि इस रकम से परियोजनाओं को पूरी करने का काम शुरू किया जाएगा।
जब्त होंगी ये संपत्तियां
- आम्रपाली समूह का ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल
- समूह का गोवा स्थित विला, इसे जब्त करने के बाद बेचा जाए
- नोएडा के जिस टावर में समूह का दफ्तर है, वह भी जब्त होगा
- गौरी सुता नामक कंपनी की संपत्तियां और बैंक खाते भी होंगे जब्त