केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार पीयूष गोयल ने स्वीकार किया है कि उत्तराखंड में नई जल विद्युत परियोजनाओं के लिए फिलहाल कोई निवेश नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जो पुरानी 39 परियोजनाएं हैं, उन्हीं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है। पर्यावरण और सहमति न बनने के कारण जल विद्युत परियोजना को प्रोत्साहन देने की गति धीमी है। उन्होंने राज्य सभा में एक प्रश्र के उत्तर में ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसा ही कुछ सिक्किम की योजनाओं को लेकर भी था जहां कुछ सफलता मिली है और पुरानी योजनाओं में काम आगे बढ़ा है।
गोयल ने कहा कि राज्यों के बीच सहमति न बनने के चलते भी जल विद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सहमति न बनने के कारण भी कुछ परियाजनाएं 30 साल से रुकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट की रोक से उत्तरखंड की गंगा-भागीरथी से जुड़ी विद्युत परियोजनाओं में नया निवेश नहीं हो रहा।
जनता दल के सांसद हरिवंश ने उत्तराखंड की दो मेगावाट उत्पादन वाली परियोजनाओं के संबंध में पूछा। जिस पर मंत्री ने बताया कि हजार करोड़ के निवेश के बीस प्रस्ताव आए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट का स्टे है। लिहाजा एनटीपीसी ने इसे बीच में रोक दिया है। जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है कहीं पर्यावरण को लेकर चिंता जताई गई है कहीं स्थानीय लोगों ने नुकसान की बात कही है।