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आपसी सहमति से अटकी है राज्यों की कई परियोजनाएं: पीयूष गोयल

Tue, 07 Feb 2017 01:29 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला,नई दिल्ली
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- फोटो : amar ujala
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केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार पीयूष गोयल ने स्वीकार किया है कि उत्तराखंड में नई जल विद्युत परियोजनाओं के लिए फिलहाल कोई निवेश नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि जो पुरानी 39 परियोजनाएं हैं, उन्हीं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है। पर्यावरण और सहमति न बनने के कारण जल विद्युत परियोजना को प्रोत्साहन देने की गति धीमी है। उन्होंने राज्य सभा में एक प्रश्र के उत्तर में ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऐसा ही कुछ सिक्किम की योजनाओं को लेकर भी था जहां कुछ सफलता मिली है और पुरानी योजनाओं में काम आगे बढ़ा है। 
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गोयल ने कहा कि राज्यों के बीच सहमति न बनने के चलते भी जल विद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। यूपी, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सहमति न बनने के कारण भी कुछ परियाजनाएं 30 साल से रुकी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट की रोक से उत्तरखंड की गंगा-भागीरथी से जुड़ी विद्युत परियोजनाओं में नया निवेश नहीं हो रहा।

जनता दल के सांसद हरिवंश ने उत्तराखंड की दो मेगावाट उत्पादन वाली परियोजनाओं के संबंध में पूछा। जिस पर मंत्री ने बताया कि हजार करोड़ के निवेश के बीस प्रस्ताव आए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट का स्टे है। लिहाजा एनटीपीसी ने इसे बीच में रोक दिया है। जल विद्युत परियोजनाओं को लेकर अनिश्चितता की स्थिति है कहीं पर्यावरण को लेकर चिंता जताई गई है कहीं स्थानीय लोगों ने नुकसान की बात कही है।
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परियोजनाओं के चलते ही आपदा ने लिया भयावह रूप

विद्युत मंत्री ने कहा कि 2013 में आई आपदा के दोनों ही पहलू सामने आए कुछ लोगों का तर्क है कि जल विद्युत परियोजनाओं के चलते ही आपदा ने भयावह रूप लिया। जबकि कुछ का तर्क है कि टिहरी डैम की वजह से आपदा की भयावहता में कमी आई नहीं तो मैदान के कई और शहर बुरी तरह प्रभावित होते। 

पीयूष गोयल ने इसी से जुड़े तापीय विद्युत परियोजनाओं को बंद करने के सवाल पर कहा पुराने संयंत्रों को चरणबद्ध तरीके से बंद कर उनकी जगह उच्च प्रौद्योगिकी के तहत संयंत्र लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि एनटीपीसी प्रदूषण बढ़ाने वाले विद्युत संयंत्र बंद करेगा। ये संयंत्र कोयला की उपलब्धता को देखते हुए 50-60 के दशक में शुरू हुए थे। 
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