केंद्र सरकार में विभिन्न राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले 'आईपीएस' अधिकारियों के लिए सैंकड़ों रिजर्व पद खाली पड़े हैं। सीएपीएफ/सीपीओ के तहत विभिन्न जांच एजेंसियां जैसे सीबीआई, आईबी, एनआईए और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में डीआईजी व एसपी के करीब 50 फीसदी खाली पद आईपीएस के आने का इंतजार कर रहे हैं। आईपीएस डीआईजी के लिए 252 पद स्वीकृत हैं, लेकिन 31 दिसंबर 2021 की स्थिति के अनुसार 118 पद रिक्त हैं। इसी तरह एसपी 'आईपीएस' के लिए 203 पद मंजूर किए गए हैं, लेकिन वर्तमान में 104 पद खाली पड़े हैं। आईजी के लिए मंजूर 140 पदों में से 29 पद रिक्त हैं। खास बात ये है कि उक्त संख्या में भी अनेक पद जो भरे हुए दिखाए गए हैं, वे आईपीएस से नहीं, बल्कि वहां पर अस्थायी तौर से सीएपीएफ अधिकारियों की तैनाती की गई है। इसके चलते अब देश के पूर्व 17 'आईपीएस' को मौजूदा अफसरों से केंद्र सरकार में सेवा देने के लिए आगे आने की अपील करनी पड़ी।
कैडर अफसरों को पद देने के बाद भी नहीं भर सकी रिक्तियां
केंद्र सरकार के अनेक प्रयासों के बावजूद ज्यादातर आईपीएस, प्रतिनियुक्ति पर नहीं आना चाहते। सीबीआई जैसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी में आईपीएस एसपी के 63 पद स्वीकृत हैं, लेकिन मौजूदा समय में वहां 41 पद खाली पड़े हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो 'आईबी' में एसपी आईपीएस के 83 पद मंजूर किए गए हैं। अभी 52 पद रिक्त पड़े हैं। इसी तरह सीबीआई में डीआईजी के 34 पदों में से 15 पद खाली हैं। आईबी में डीआईजी आईपीएस के 63 पद रिजर्व हैं। हैरानी की बात है कि इनमें से 41 पद खाली पड़े हैं। बीएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 26 पद हैं, लेकिन नौ पद खाली हैं। बता दें कि यह संख्या भी तब है, जब 15 पद कैडर अफसरों को अस्थायी तौर पर दे दिए गए हैं। आईजी की बात करें तो बीएसएफ में आईपीएस के लिए 22 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 12 पद खाली पड़े हैं। सीआईएसएफ में आईपीएस डीआईजी के 20 पद मंजूर हैं, लेकिन 17 पद रिक्त हैं। एनपीए में डीआईजी के पांच पद स्वीकृत हैं, जिनमें से पांचों पद ही खाली हैं। सीआरपीएफ में आईपीएस डीआईजी के 38 पद हैं, लेकिन वहां 30 पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दे दिए गए हैं। इसके बाद भी चार पद खाली पड़े हैं। ऐसे में आईपीएस अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने की इच्छा का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सख्त जॉब से बचना चाहते हैं अधिकारी
बीएसएफ के पूर्व एडीजी एसके सूद का कहना है, आईपीएस अधिकारी किसी भी तरह की सख्त जॉब से बचना चाहते हैं। उन्हें अपने राज्य में एसपी के पद पर जिला पुलिस की कमान संभालने का मौका मिलता है, इसलिए वे वहां से कहीं नहीं जाना चाहते। जब वे डीआईजी बनते हैं तो खुद के लिए सुविधा वाली पोस्टिंग तलाशते हैं। अगर उन्हें वह पद केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर नहीं मिलता तो वे ऐसे पद पर ज्वाइन नहीं करते। केंद्रीय पुलिस संगठन या अर्धसैनिक बलों में डीआईजी बनकर आईपीएस नहीं आना चाहते। इन बलों में डीआईजी का पद 'फील्ड पोस्टिंग' के अंतर्गत आता है। बॉर्डर एरिया में तैनाती होती है। कई अफसर हेडक्वार्टर में रहने का जुगाड़ कर लेते हैं, लेकिन ज्यादातर डीआईजी को दूरदराज की यूनिटों में पोस्टिंग मिलती है। आईजी और एडीजी जैसे पद ज्यादातर मुख्यालयों में होते हैं, इसलिए आईपीएस यहां तुरंत ज्वाइन कर लेते हैं। खाली पड़े पदों पर कैडर अधिकारियों को स्थायी पदोन्नति भी नहीं दी जाती। जब आईपीएस अफसर 'डीआईजी' के पद पर ज्वाइन नहीं करता है तो कुछ पदों को कैडर अधिकारियों की तरफ डायवर्ट कर दिया जाता है। ये पद अस्थायी तौर पर कैडर अधिकारियों को दिए जाते हैं। अगर स्थायी तौर पर उनकी नियुक्ति होती है तो उन्हें समय रहते प्रमोशन मिल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जाता।
17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने आईपीएस से की अपील
शुक्रवार को भारतीय पुलिस सेवा (आईपीस) के 17 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने सेवारत आईपीएस से केंद्र सरकार के तहत सेवा देने के लिए आगे आने की अपील की है। पूर्व अफसरों ने कहा, आईपीएस को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आना चाहिए। उन्हें यहां पर विभिन्न जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों में काम करने का मौका मिलता है। वे समय रहते इन अवसरों का लाभ उठाएं। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति, केंद्र और राज्य सरकार के बीच संबंधों को मजबूत करती है। अखिल भारतीय सेवाएं ही सबसे महत्वपूर्ण सूत्र हैं जो भारतीय संघ और राज्यों को एक साथ जोड़ते हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारियों के रूप में हम आईपीएस अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के लिए प्रोत्साहित करने तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के वृहद एवं सूक्ष्म स्तर पर योगदान के लिए भारत सरकार की पहल का समर्थन करते हैं। मौजूदा नियमों के तहत आईपीएस कैडर के 5000 पदों में से 2700 वरिष्ठ ड्यूटी पोस्ट (एसपी से डीजी रैंक) और 1075 (40 फीसदी) केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रिजर्व (सीडीआर) के लिए निर्धारित हैं। केंद्र में स्वीकृत 645 पदों में से 442 आईपीएस अधिकारी अभी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं।