बाग के दरख्तों ने बचाई कई पुलिसवालों की जान।
- फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
जवाहर बाग में एसओ फरह संतोष यादव और एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के अलावा और भी कई पुलिसकर्मी शहीद हो सकते थे। इनकी जान बाग के दरख्तों ने बचा ली। दोनों अफसरों के शहीद होने के बाद जब कब्जाधारी अंधाधुंध फायर किए जा रहे थे, तब वहां मौजूद पुलिसवालों के पास जवाब देने के लिए हथियार नहीं थे। इन्होंने अपनी जान पेड़ों के पीछे छिपकर बचाई। इसकी गवाही पेड़ों में धंसी मिली कब्जाधारियों की गोलियां दे रही हैं।
पुलिस की एक टीम पूरे घटनाक्रम का ब्योरा तैयार कर रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि जिस जगह दीवार तोड़ी गई, पुलिस पर हमला वहीं पर हुआ था। सबसे पहले एसओ फरह संतोष यादव को नजदीक से गोली मारी गई। उनके गिरते ही कब्जाधारी चिल्लाने लगे, सिपाही मार दिया, सिपाही मार दिया। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी उनकी ओर दौड़े। तभी कब्जाधारियों ने दीवार तोड़ने से गिरे पत्थर उठा लिए। मुकुल द्विवेदी के सिर पर पीछे से पत्थर मारा गया था।
उस समय वहां आठ पुलिसकर्मियों के पास हथियार थे। सभी पीठ दिखाकर भाग गए। वहां बचे पुलिसकर्मियों के पास केवल लाठियां थीं। सामने से गोलियां चल रहीं थी। बचना आसान नहीं था। कुछ और नहीं मिला तो वे पेड़ों के पीछे छिप गए। करीब 20 पेड़ों पर गोलियां धंसी मिली हैं। थोड़ी देर बाद आई पुलिस ने हवाई फायर किए। तब इनकी जान में जान आई।