जम्मू कश्मीर, खासतौर पर घाटी के कई इलाकों से पाकिस्तान में शिक्षा ग्रहण करने गए छात्र अब भारतीय जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि हुर्रियत नेताओं, अलगाववादियों और कश्मीर में कथित तौर से सामाजिक संगठनों के नाम पर आतंकियों के मददगार बने बैठे व्यक्तियों ने बहुत से युवकों को छात्र बनाकर पाकिस्तान भेजा है। वहां जाकर ये युवक पाकिस्तान के आतंकी संगठनों और कश्मीर में बतौर स्लीपर सेल काम कर रहे लोगों के बीच कड़ी बन बैठे हैं।
जांच में यह भी पता चला है कि ये युवक बहुत चतुराई के साथ हवाला चैनलों के जरिए मिनटों में करोड़ों रुपये इधर से उधर कर देते हैं। दुबई और खाड़ी के कई देशों के साथ इनके लिंक हैं। आतंकियों तक आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए इन्होंने कश्मीर और पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर मुखौटा कंपनियां पंजीकृत कराई हैं। बता दें कि एनआईए ने अभी तक ऐसी तीन चार्जशीट पेश की हैं, जिनमें आतंकियों की मदद के लिए कश्मीरी संगठनों, हुर्रियत नेताओं और अलगाववादियों का नाम सामने आया है।
एनआईए जांच में पता चला है कि कश्मीर में मौजूद स्लीपर सेल पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देशों पर बहुत व्यवस्थित तरीके से काम करते हैं। पाकिस्तान में मौजूद कश्मीरी युवक स्लीपर सेल का कामकाज देखते हैं। इन्होंने कश्मीर में कई स्तरों पर अपना संगठन बना रखा है। ग्रामीण इलाकों और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग संगठन हैं, जबकि छोटे-छोटे ब्लॉक एवं जिला स्तर पर भी इकाइयां गठित की गई हैं। स्लीपर सेल को किस इलाके के युवा गुमराह करने हैं, उन्हें यह सब निर्देश पाकिस्तान से ही मिलते हैं। वहां पर यह काम कश्मीरी युवकों को सौंपा गया है।
वजह, वे आसानी से कश्मीरी युवकों के साथ बातचीत कर उन्हें अपने साथ मिला लेते हैं। सोशल मीडिया पर कब और कौन सी सूचना वायरल करनी है, ऐसे सभी आदेश पाकिस्तान में मौजूद कश्मीरी छात्रों की तरफ से दिए जाते हैं। पत्थरबाजी की घटनाओं को अंजाम देना और आतंकवादियों से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रेरित करने के दूसरे साधनों का इस्तेमाल, यह आदेश भी सीमा पार से आता है।
एक अधिकारी के अनुसार, कश्मीर में अब काफी हद तक आतंकियों के नेटवर्क का पता लगा लिया गया है। कश्मीर के किस हिस्से से कितने युवक पढ़ाई के नाम पर पाकिस्तान भेजे गए हैं, अब यह जांच की जा रही है। देश की बाहरी खुफिया एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि पाकिस्तान के विश्चविद्यालयों में गए कश्मीरी छात्र वहां क्या कर रहे हैं। वे किन संगठनों के साथ जुड़े हैं। कश्मीर में किस संगठन के साथ उनकी बातचीत होती है। उन्हें किस संगठन की मदद से पाकिस्तान भेजा गया, यह सब जानकारी जुटाई जा रही है।