क्या आप जानते हैं कि असम के गृह सचिव प्रतीक हाजेला, लोकसभा सांसद, इत्र कारोबारी और आल
इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) प्रमुख बदरुद्दीन अजमल, अभिनेत्री से विधायक बनी अंगूरलता डेका और उग्रवादी संगठन अल्फा (आई) के स्वयंभू अध्यक्ष परेश बरुआ में क्या समानता है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए आपको असम के
राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के पहले मसौदे को खंगालना होगा।
इसकी वजह यह है कि राज्य के मूल नागरिकों की पहचान के लिए तैयार होने वाले एनआरसी के पहले मसौदे में इनके नाम शामिल नहीं हैं। वैसे, इस मसौदे में 3.3 करोड़ में से महज 1.9 करोड़ लोगों के ही नाम शामिल हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल समेत एनआरसी को अपडेट करने की कवायद से जुडे़ अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि पहले मसौदे में शामिल नहीं होने वाले लोगों को आतंकित होने की कोई जरूरत नहीं है। उनके दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया जारी है। उसके पूरी होने के बाद दूसरा मसौदा प्रकाशित किया जाएगा।
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लेकिन सोमवार सुबह से ही राज्य के ढाई हजार सेवा केंद्रों पर जुट रही भीड़ को इस भरोसा पर भरोसा नहीं है। जिनके नाम पहले मसौदे में शामिल नहीं हो सके हैं उनके माथे पर चिंता की लकीरें लगातार गहरी होती जा रही हैं। कछार जिले में तो एक व्यक्ति ने अपना नाम इस सूची में नहीं पा कर आत्महत्या तक कर ली। अल्फा प्रमुख परेश बरुआ के परिवार के पांच सदस्यों के नाम इस सूची में शामिल हैं।