अधिकांश राज्यों में लंपी वायरस की निगरानी नहीं होने के चलते वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है। इनका मानना है कि जिस तरह कोरोना वायरस अपने स्वरूप में चौथे साल भी बदलाव कर रहा है, उतना तेज नहीं लेकिन लंपी वायरस के आनुवंशिक स्वरूप में भी बदलाव हुए हैं। किस राज्य में कौन सा स्वरुप है, इसकी जानकारी किसी के पास नहीं है।
नई दिल्ली स्थित आईजीआईबी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विनोद स्कारिया ने कहा, बीते साल देश ने लंपी वायरस का प्रकोप देखा। राजस्थान के साथ मिलकर उनकी एक टीम ने जीनोम सीक्वेंसिंग से लंपी वायरस के कुछ नए स्वरुप का पता लगाया। इसके चलते सभी राज्यों से जीनोमिक निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया लेकिन अब तक राज्यों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। भारत में अभी तक लंपी वायरस की भौगोलिक स्थिति, मामले और मौतें गंभीर सवाल बने हुए हैं। यह स्थिति तब है जब देश के पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा, प्रशिक्षित कर्मचारी और नेटवर्क मौजूद है।
न इलाज, न टीका फिर भी सुस्त रवैया
भारत में लंपी वायरस को लेकर अब तक न उपचार है और न ही कोई विशेष टीका मौजूद है। इसके बाद भी राज्य सरकारें गोवंश को लेकर गंभीर नहीं है। मौजूदा समय में गोट पॉक्स वैक्सीन दी जा रही है जो लंपी वायरस के खिलाफ 60 से 70 फीसदी तक असरदार है। टीका के लिए सीक्वेंस और आइसोलेशन जरूरी है।
इसलिए निगरानी है जरूरी
विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, भारत में 53.67 करोड़ पशुधन हैं। देश की कुल जीडीपी का 4.9 फीसदी हिस्सा इसी क्षेत्र से प्राप्त होता है क्योंकि सालाना 18.77 करोड़ मीट्रिक टन के साथ दुनिया में भारत दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। कृषि क्षेत्र की कुल जीडीपी में 28.4 फीसदी का योगदान भी इसी क्षेत्र का है। गोवंश को संक्रमण होने का नुकसान पालक और देश की अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ता है।
मौजूदा स्थिति
एक माह में 10, 413 मामले और 100 मौतें हुईं। 2022 में 20 लाख से ज्यादा मामले और 1.55 लाख गोवंशों की मौत हुई। बीते दो साल में लंपी वायरस से अकेले राजस्थान में 76030 गोवंशों की मौत हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और 10 राज्यों से इस पर जवाब मांगा है। कुछ राज्यों ने अब तक जानकारी नहीं दी है लेकिन राजस्थान ने 222 करोड़ रुपये आवंटित करने की जानकारी दी है।
- मेडिकल जर्नल स्प्रिंगर में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिकों को वायरस के 177 वेरिएंट मिले जिनमें 47 वेरिएंट का मौजूद साक्ष्यों में किसी वेरिएंट से मेल नहीं मिला है।
जलवायु परिवर्तन पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं है लेकिन इसकी निश्चित रूप से भूमिका है। कहीं वर्षा ज्यादा हो रही है तो कहीं सर्दी के दिन कम हो रहे हैं। प्रकृति बदल रही है। इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।- प्रोफेसर रतीश आर, केरल पशु विज्ञान विश्वविद्यालय