सूखे का असर बिजली के उत्पादन पर भी पड़ता दिख रहा है। हालांकि देश की बिजली उत्पादन क्षमता लगभग 2.59 लाख मेगावाट होने की वजह से देश में बिजली की आपूर्ति पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सूखे की वजह से जल विद्युत के उत्पादन में पहले ही कमी आ चुकी है। थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए सूखा प्रभावित इलाके में बिजली के उत्पादन में कमी आ सकती है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश से लेकर केरल तक की 50 से अधिक यूनिटें पानी का संकट झेल रही हैं जिससे बिजली के उत्पादन पर असर पड़ रहा है। बिजली मंत्री पीयूष गोयल भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि सूखे की वजह से जल विद्युत परियोजनाओं से बिजली के उत्पादन में कमी आई है।
सूखे की चपेट में फिलहाल देश के कई राज्य हैं और महाराष्ट्र में सूखे का असर सबसे अधिक है। महाराष्ट्र पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) के मुताबिक, प्रदेश में पानी की किल्लत व गिरते जल स्तर को देखते हुए अगले दो-तीन सप्ताह तक थर्मल बिजली का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
महाजेनको ने पानी की किल्लत को देखते हुए मराठवाड़ा इलाके में स्थित 130 मेगावाट के पर्ली पावर प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया है। वारोड़ा स्थित जीएमआर के थर्मल पावर प्लांट को भी पानी के अभाव में फिलहाल बंद कर दिया गया है और कई प्लांट पानी की कमी के कारण बंदी के कगार पर हैं।
पानी की किल्लत की वजह से कर्नाटक की कई जल विद्युत यूनिटों से बिजली के उत्पादन को निलंबित कर दिया गया गया है या बंद कर दिया गया है। इनमें कर्नाटक के पहाड़ी क्षेत्र शिवानसमुद्रा स्थित जल विद्युत प्लांट सर के शेषाद्रि अय्यर पावर स्टेशन की सभी 10 यूनिट शामिल हैं।