विदेश यात्रा पर गए देश के 30 डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द हो सकता है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करने वाले इन डॉक्टरों के खिलाफ नोटिस जारी किया है। ये सभी डॉक्टर हाल ही में एक अमेरिकन फार्मा कंपनी के खर्च पर विदेश घूमने गए थे। इनकी यात्रा पर करीब दो करोड़ से भी ज्यादा राशि खर्च हुई।
केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी) ने दो दिन पहले अमेरिकी दवा कंपनी एबवी हेल्थकेयर की भारतीय शाखा को यूनिफॉर्म कोड फॉर फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रैक्टिस (यूसीपीएमपी) नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया। डीओपी ने एनएमसी को जारी पत्र में 30 डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है, जो कंपनी के खर्च पर विदेश घूमने गए थे। इनमें से कुछ सरकारी डॉक्टर हैं, जिन्होंने अत्याधुनिक तरह के इलाज के बारे में प्रशिक्षण लेने का बहाना दिया था।
इस साल फरवरी और मार्च में की यात्रा
केंद्र सरकार ने बीते 23 दिसंबर को जारी आदेश में फार्मा कंपनी को यूनिफॉर्म कोड का उल्लंघन करने पर फटकार लगाई। इसी साल मई माह में फार्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी) को शिकायत मिली, जिसमें आरोप लगाया कि फार्मा कंपनी ने सौंदर्यशास्त्र और एंटी-एजिंग मेडिसिन वर्ल्ड कांग्रेस की आड़ में भारत के 30 डॉक्टरों को मोनाको और पेरिस की यात्रा कराई है। इसी साल एक से तीन फरवरी और 26 से 29 मार्च दो अलग-अलग यात्रा की गईं।
गरीबों की सेवा में खर्च का प्रस्ताव कंपनी ने ठुकराया
केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब समिति ने जांच शुरू की, तो फार्मा कंपनी से कहा गया कि खर्च के बराबर की राशि को गरीब मरीजों की सेवा में लगाया जाए, लेकिन बीते 10 दिसंबर को कंपनी ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद समिति ने कंपनी और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का सख्त फैसला लिया।
तरह-तरह के ऑफर देकर विदेश घूमने वाले डॉक्टरों और फार्मा कंपनी के खिलाफ यह सरकार की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। अधिकारियों का कहना है कि यूसीपीएमपी नियम 2024 के तहत स्व-घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले कंपनी के कार्यकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं, आरोप साबित होने पर संबंधित डॉक्टर प्रैक्टिस करने के लिए अपना पंजीकरण खो सकते हैं।
जांच के बाद कंपनी के सभी दावे सरकार ने किए खारिज
जांच समिति ने पाया कि फार्मा कंपनी ने डॉक्टरों की इस यात्रा पर कुल 1,91,24,991 रुपये खर्च किए हैं, जो पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है। आदेश में यह भी बताया कि सुनवाई के दौरान कंपनी ने पहले नियम-कानून समझाने की कोशिश की, लेकिन उनके सभी दावों की जांच के बाद भी उल्लंघन सही पाया गया।