नई दिल्ली। दलितों पर अत्याचार को लेकर राजनीतिक दलों के बीच संसद से सड़क तक घमासान है। लेकिन उत्तर प्रदेश में दलित और वंचित वर्गों की अनुसूचित जाति जनजाति की श्रेणी की कई जातियां लुप्त होने की कगार पर हैं, जिनकी ओर किसी का ध्यान नहीं है। ये वो दलित जातियां हैं जो दो दशक पहले तक गांवों और कस्बों में अच्छी खासी तादाद में नजर आती थीं। लेकिन अब उनकी गिनती पूरे प्रदेश में गिनी चुनी रह गई है। जबकि इस राज्य में पिछले बीस वर्षों में चार बार दलितों की सबसे बड़ी नेता मायावती की सरकार रह चुकी है और पिछड़े दलित और अल्पसंख्यकों की दुहाई देने वाली समाजवादी पार्टी की सरकार भी चौथी बार राज्य में है।
वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में चार करोड़ 13 लाख से भी ज्यादा दलित आबादी में लुप्त प्राय इन अनुसिचत जाति जनजातियों में कई की आबादी घटकर एक हजार और कुछ की तो 100 से भी कम रह गई है।
दलित अधिकारों केलिए काम करने वाले शीर्ष संगठन नैकडोर के अध्यक्ष अशोक भारती के मुताबिक बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिककरण ने इन जातियों केपरंपरागत पेशों को खत्म कर दिया है। जिससे एक तरफ इन जातियों को नया काम खोजने के लिए अपने मूल स्थानों से विस्थापित होना पड़ रहा है, साथ ही वैकल्पिक रोजगार न मिलने से इनकी बदहाली और बढ़ गई, जिसकी वजह से इनकी आबादी भी तेजी से घटती जा रही है।
जनगणना केआंकड़ो के मुताबिक उत्तर प्रदेश में दस हजार से कम आबादी वाली अनुसूचित जाति और जनजातियों की संख्या 25 है। इनमें एक हजार से भी कम आबादी वाली जातियों में बाजगी, चेरो, घरामी, गुवाल, खैरहा, लालबेगी, पंखा, पाटरी, सनौरिहया, शामिल हैं। इनमें घरामी जाति के लोगों की तादाद सिर्फ 37 ही बची है। जिनमें ग्रामीण क्षेत्र में दस और शहरी क्षेत्र में 27 लोग हैं। इसी तरह सनौहरिया जाति के कुल 47 लोग ही बचे हैं। जिनमें 36 ग्रामीण और 11 शहरी इलाकों में हैं। जबकि गुवाल जाति के सिर्फ 340, पाटरी जाति के 366, लालबेगी जाति के 560, चेरो जाति केसिर्फ 596, बाजगी जाति के 886, खैरहा जाति के 892, पंखा जाति के 916 लोग बचे हैं।
जबकि एक हजार से ज्यादा और दस हजार से कम आबादी वाली अनुसूचित जातियों में अगरिया (5803), बधिक (9018),बजनिया (2611), बालाहर (5029), बलाई (1200), बावरिया (7223), भुइया (4095), बोरिया (4558), दबगर (7000), घसिया (5888), हाबुरा (6015), हरी (3643), करवल (7183), खोरोट (1219), कोरवा (1563), पराहिया (2446) और सांसिया (5689) शामिल हैं।
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति जनजाति की कुल आबादी चार करोड़ 13 लाख 57 हजार 608 है। इनमें पुरुषों की तादाद दो करोड़ 16 लाख 76 हजार 975 और महिलाओं की संख्या एक करोड़ 96 लाख 80 हजार 633 है। ग्रामीण क्षेत्र में दलितों की कुल आबादी तीन करोड़ 56 लाख 85 हजार 227 और शहरी क्षेत्र में 56 लाख 72 हजार 381 है।
ग्रामीण क्षेत्र में अनुसूचित जाति जनजाति केपुरुषों की संख्या एक करोड़ 86 लाख 63 हजार 920 और महिलाओं की संख्या एक करोड़ 70 लाख 21 हजार 307 है। जबकि शहरी इलाकों में दलित पुरुषों की संख्या 30 लाख 13 हजार 55 और महिलाओं की तादाद 26 लाख 59 हजार 326 है।