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दोस्त अरुण को अंतिम विदाई नहीं दे सका, मेरे दिल पर इसका बोझ हमेशा रहेगा: पीएम मोदी

Tue, 10 Sep 2019 08:49 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरुण जेटली की श्रद्धांजलि सभा - फोटो : एएनआई
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नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आज यानि मंगलवार को पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहुंचे। प्रधानमंत्री के अलावा भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत और भी कई बड़े नेता पहुंचे।
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यहां पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, मैंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन ऐसा आएगा जब मुझे अपने दोस्त को श्रद्धांजलि देनी पड़ेगी। हम दोनों कई सालों से दोस्त थे, लेकिन मैं उन्हें अंतिम विदाई नहीं दे सका। मेरे दिल पर इसका बोझ हमेशा रहेगा।
 
उन्होंने कहा, वे सर्वमित्र थे, वे सर्वप्रिय थे और वे अपनी प्रतिभा, पुरुषार्थ के कारण जिसके लिए जहां भी उपयोगी हो सकते थे, वे हमेशा उपयोगी होते थे। अरुण जेटली का जीवन इतनी विविधताओं से भरा हुआ था कि दुनिया की किसी भी समकालीन चीज की बात निकालिए, वे उसका पूरा कच्चा चिट्ठा खोल देते थे। उनके पास जानकारियों का भंडार था ।
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उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति की पौधशाला में पैदा हुआ पौधा हिंदुस्तान की राजनीति के विशाल फलक में एक वट वृक्ष बनकर उभर आए, ये अपने आप में बहुत बड़ी बात है। प्रतिभा को एक निश्चित दिशा में ढालकर उन्होंने हर काम में एक नयी ऊर्जा और एक नई सोच दी। इस समारोह में अपनी बात रखने के दौरान भावुक हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी किसी की जिंदगी में ऐसे पल नहीं आने चाहिए कि उसे अपने उम्र में छोटे दोस्त को अंजलि देना पड़े।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की राजनीति में एक खालीपन आ गया है। भारत के सभी राजनीतिक दल भी यही महसूस करते है। बुद्धिजीवियों के बीच भाजपा को लेकर सोच को बदलने में अगर किसी की भूमिका रही है तो वह अरुण जेटली की रही है।

कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि वे शानदार व्यक्तित्व थे जिनके साथ 35 वर्षों तक जुड़ाव रहा। अदालत से लेकर संसद तक हम दोनों एक दूसरे का विरोध करते थे लेकिन फिर भी हमेशा जुड़े रहे । वे बड़े दिल के व्यक्ति थे। अरुण जेटली के निधन से हमने अच्छा व्यक्ति एव विनम्र मनुष्य खो दिया। वे एक ऐसे व्यक्ति थे जो राजनीति के आजीवन छात्र थे और अपनी पार्टी के समर्पित स्तम्भ रहे।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि जेटली के असमय चले जाने से देश, संसद, भाजपा, उनके परिवार और उनकी निजी क्षति हुई है। जो रिक्तता उनके जाने से सार्वजनिक जीवन में बन गई है, वह लंबे समय तक नहीं भर पाएगी । उन्होंने कहा कि अरुण जेटली बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। सार्वजनिक जीवन के कई क्षेत्रों में उनका दखल रहता था और वह समय-समय पर मार्गदर्शन भी करते थे। ढेर सारे लोगों से मित्रता बनना उनकी विशेषता थी। कोई व्यक्ति अंतिम समय तक कैसे काम कर सकता है, कैसे कोई व्यक्ति देश हित को पार्टी लाइन से उपर रख सकता है, वह उसके उदाहरण थे। वे हमेशा एक बड़े भाई की तरह खड़े रहे, चट्टान के जैसे मेरे साथ खड़े रहे।
 
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भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जे पी नड्डा ने कहा कि देश ने उच्चतम कोटि का नेता असमय खो दिया । उनकी कमी केवल भाजपा ही नहीं बल्कि भारतीय राजनीति में सभी को खलेगी। विरोधों के बावजूद सभी को साथ लेकर चलने की कला उनकी विशेषता रही। पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अभूतपूर्व थी । विपक्ष के लोग भी उनकी विद्वता और राजनीतिक कौशल का लोहा मानते रहे। लेकिन साथ ही साथ हमेशा उन्हें आदर के भाव से देखा गया।

राकांपा के नेता शरद पवार ने कहा कि कभी जिंदगी में नहीं सोचा था कि जेटली को श्रद्धांजलि देना पड़ेगा। कोई भी समस्या होती थी तब अरुण जी का आवास ऐसा स्थान था, जहां हम जा सकते थे। लोजपा नेता रामविलास पासवान ने कहा कि जेटली उम्र में उनसे छोटे थे लेकिन संसद के भीतर और बाहर उन्होंने सदैव एक मार्गदर्शक के रूप में काम किया। उनमें नीरस व गूढ़ चीजों को सरल एवं सरस बनाने की अद्भुत कला थी।

परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद ने कहा कि अरुण जेटली ऐसे व्यक्तित्व थे जो वरिष्ठ भी थे और सभी को इष्ट भी थे। वे एक प्रखर वक्ता और सफल अधिवक्ता थे।

राज्यसभा सदस्य व बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि अरुण जेटली से उनका साथ 38 वर्षों से रहा। उनके बारे में कछ भी कहा जाए, वह कम होगा। वह सही मायने में इंसान और दोस्त थे।

तृणमूल कांग्रेस के दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि अरुण जेटली का पूरा जीवन खेल भावना से भरा था। संसद में तीखी नोकझोंक के बावजूद बाहर निकलने के बाद खुलकर मिलते थे। जेटली एक सेतु थे जो हमेशा बनाने की बात करते थे, हमेशा जोड़ने की बात करते थे।

सपा नेता राम गोपाल यादव ने कहा कि अरुण जेटली वरिष्ठ पद पर रहे लेकिन हमेशा मिलनसार व सर्वसुलभ रहे। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में जब भी वह नेता सदन की कुर्सी की ओर देखेंगे तो उन्हें जेटली की याद आएगी।

अकाली दल के सुखवीर बादल ने कहा कि जेटली एक ऐसे सेतु थे जो सरकार और सभी राजनीतिक दलों के बीच सम्पर्क का काम करते थे, भले ही सरकार किसी की हो। वे सभी दलों के प्रिय थे।

भाकपा नेता डी राजा ने कहा कि जेटली अपने समय के लोकप्रिय छात्र नेता, प्रखर वक्ता, शानदार लेखक एवं बेहतरीन नेता थे।

बता दें कि अरुण जेटली का निधन 24 अगस्त को दोपहर 12 बजे दिल्ली के एम्स में हुआ था। 25 अगस्त को दिल्ली के निगमबोध घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। 66 साल के पूर्व वित्त मंत्री जेटली को सांस लेने में दिक्कत और बेचैनी की शिकायत के बाद नौ अगस्त को एम्स लाया गया था। एम्स ने 10 अगस्त के बाद से जेटली के स्वास्थ्य पर कोई बुलेटिन जारी नहीं किया था। जेटली ने खराब स्वास्थ्य के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था।

इस साल मई में उन्हें इलाज के लिए एम्स में भर्ती कराया गया था। बाद में उन्हें छुट्टी दे दी गई थी। पिछले साल 14 मई को उनका एम्स में गुर्दे का प्रत्यारोपण हुआ था। जेटली पिछले साल अप्रैल से वित्त मंत्रालय नहीं जा रहे थे। हालांकि वह 23 अगस्त, 2018 को दोबारा अपने मंत्रालय पहुंचे थे। उनकी गैर मौजूदगी में तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोलय को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।
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