महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। मुंबई पुलिस ने कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल को 19 सितंबर को आजाद मैदान में प्रस्तावित भूख हड़ताल के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद जरांगे पाटिल ने राज्य की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
जालना जिले के अंतरवाली सराटी से मीडिया को संबोधित करते हुए जरांगे पाटिल ने कहा कि सरकार प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही यह मान रही है कि प्रदर्शनकारी नियम तोड़ेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राज्य को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।
जरांगे ने फडणवीस सरकार को दिया क्या अल्टीमेटम?
मनोज जरांगे पाटिल ने रविवार को महाराष्ट्र सरकार को आठ दिन का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने कहा कि अगर इस अवधि में मराठा समुदाय की आरक्षण संबंधी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह 19 सितंबर को सुबह 10 बजे मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन शुरू करेंगे।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार तय समय में कार्रवाई नहीं करती है तो मराठा आरक्षण का आंदोलन अब मुंबई में होगा। उन्होंने कहा, 'सरकार के पास अब आठ दिन बचे हैं। अगर इस अवधि में मराठा समुदाय की मांगें पूरी नहीं हुईं तो मैं 19 सितंबर को सुबह 10 बजे मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन पर बैठूंगा। इसके बाद जो भी होगा, वह मुंबई में होगा। सरकार गरीब मराठों की समस्याओं की कोई परवाह नहीं करती।'
जरांगे को क्यों नहीं मिली आजाद मैदान में भूख हड़ताल की इजाजत?
मुंबई पुलिस ने 2025 के सार्वजनिक सभा, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार किया। पुलिस ने आजाद मैदान में पिछले प्रदर्शनों के दौरान शर्तों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया। जरांगे पाटिल ने पुलिस के फैसले पर सवाल उठाते हुए हाल में हाईकोर्ट की उस टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें मुंबई में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता।
जरांगे ने मुंबई पुलिस के फैसले पर उठाए क्या सवाल?
उन्होंने कहा, 'सरकार यह कैसे मान सकती है कि प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही हम नियमों का उल्लंघन करेंगे? आखिर यह सरकार किस कानून के तहत काम कर रही है?' जरांगे पाटिल ने कहा, 'उच्च न्यायालय ने कहा है कि हमें रोका नहीं जा सकता, फिर भी पुलिस न्यायपालिका की भावना के खिलाफ काम कर रही है। यह तानाशाही और मनमानी से कम नहीं है।'
आगामी त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंकाओं को भी उन्होंने खारिज किया। उन्होंने कहा कि पहले भी गणेश चतुर्थी के दौरान उनके आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से हुए हैं और इससे कोई समस्या नहीं हुई। उन्होंने कहा, 'हम संविधान के प्रति प्रतिबद्ध हैं और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार के मनमाने निर्देशों के आगे नहीं झुकेंगे। पुलिस आयुक्त के आदेश के खिलाफ आगे क्या कदम उठाना है, इसका फैसला हमारी कानूनी टीम करेगी।'
15 सितंबर को पदयात्रा होना तय
जरांगे पाटिल ने यह भी दोहराया कि अंतरवाली सराटी से उनकी पदयात्रा 15 सितंबर को तय कार्यक्रम के अनुसार शुरू होगी। पुलिस के फैसले के विरोध में और राज्य सरकार पर राजनीतिक निशाना साधने का आरोप लगाते हुए जरांगे पाटिल ने तत्काल अपना चिकित्सा उपचार और तरल पदार्थ लेना बंद करने की घोषणा की।
उन्होंने कहा, 'अगर प्रशासन अन्याय के जरिए हमारी आवाज दबाना चाहता है, तो मैं इसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार हूं, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं करूंगा।' उन्होंने कहा कि 19 सितंबर की प्रस्तावित भूख हड़ताल की तारीख नजदीक आने के बीच उनकी कानूनी टीम आने वाले दिनों में पुलिस के अनुमति से इनकार करने के आदेश को चुनौती दे सकती है।