रक्षामंत्री मनोहर परिकर ने क्वेटा के पुलिस प्रशिक्षण अकादमी पर हुए आतंकी हमले की तुलना ‘भस्मासुर’ से करते हुए हमले जान गंवाने वालों पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं बताती हैं कि किसी को भी ‘अनियंत्रित हिंसा’ नहीं करनी चाहिए। परिकर ने हमले में भारत की संलिप्तता के पाकिस्तानी आरोपों से भी इंकार किया और कहा कि भारत हिंसा में ही भरोसा नहीं करता, और ऐसी हिंसा पर तो बिल्कुल भी नहीं।
क्वेटा हमले के बारे में पूछने पर परिकर ने स्पष्ट किया कि वह किसी देश की तुलना असुर से नहीं कर रहे हैं, बल्कि भारत में भस्मासुर राक्षस की कहावत का जिक्र कर रहे हैं जो अपनी जिन शक्तियों से दूसरों को डराता था उन्हीं के उपयोग से एक दिन उसका खुद नाश हो गया। वह नौसेना कमांडरों के सम्मेलन के इतर संवाददाताओं से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आतंकवाद में संलिप्त नॉन स्टेट एक्टर्स को खत्म किया जाना चाहिए।
क्या है लश्कर-ए-झांगवी गुट
मेजर जनरल शेर अफगान के मुताबिक तीनों फिदायीन हमलावर लश्कर-ए-झांगवी आतंकी गुट के थे। यह पाकिस्तान तालिबान से जुड़ा सुन्नी आतंकी गुट है, जिसे अमेरिका द्वारा आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। संगठन को कई बार शियाओं पर जानलेवा हमलों का जिम्मेदार ठहराया गया है। इसकी स्थापना 1996 में सिपाह-ए-सहाबा पाकिस्तान के एक कार्यकर्ता रियाज बसरा की तत्कालीन नेतृत्व से अनबन के बाद हुई थी।