सिंह ने अपने खत में यह भी कहा है कि किसी भी तरह के प्रयास से नेहरू के रोल और योगदान को मिटाया नहीं जा सकता। इस भावना का आदर करें और तीन मूर्ति भवन को उन्हीं के नाम से रहने दें। इसमें किसी प्रकार का कोई बदलाव न करें। इस तरह हम इतिहास और विरासत दोनों का सम्मान करेंगे।
सिंह ने आगे कहा है कि एनएमएमएल भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की स्मृति को समर्पित है। साथ ही यह भारतीय राष्ट्र-राज्य के प्रमुख वास्तुकार के हुनर की झलक भी दिखाता है जिन्होंने हमारे देश और वास्तव में दुनिया पर एक अविश्वसनीय छाप छोड़ी है। नेहरू के बारे में लिखते हुए सिंह ने कहा है कि उनकी उनकी विशिष्टता और महानता को राजनीतिक विरोधियों द्वारा भी स्वीकार किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा है कि नेहरू के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन के लिए लिहाज से ये ऐसे ही बना रहना चाहिए। क्योंकि नेहरू ने स्वतंत्रता आंदोलन में अमूल्य भूमिका निभाई है। उन्होंने करीब 10 साल जेल में बिताए हैं। खत में उन्होंने दोहराते हुए कहा है कि ''हमें इस भावना का सम्मान करना चाहिए और हमारे देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू से जुड़े तीन मूर्मि मेमोरियल में किसी भी प्रकार की कोई छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। इस तरह हम इतिहास और विरासत दोनों के प्रति सम्मान प्रकट करेंगे। पंडित नेहरू केवल कांग्रेस से संबद्ध नहीं हैं बल्कि पूरे देश से उनका नाता है। इसी भावना के तहत मैं आपको यह खत लिख रहा हूं।''