पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पार्थिव शरीर आज पंचतत्व में विलीन हो गया। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी सहित सैकड़ों बड़े लोग पहुंचे। निगमबोध घाट पर अपने प्रिय पूर्व प्रधानमंत्री को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में सामान्य लोग भी पहुंचे।
मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई देने वाले लोग चाहे जिस वर्ग के हों, सबकी जुबान पर एक ही शब्द बार-बार आ रहा था कि वो बेहद अच्छे इंसान थे। प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यों की सफलता-असफलता पर बात करने से ज्यादा लोग उनके व्यक्तिगत व्यवहार की चर्चा कर रहे थे। यह उनकी व्यक्तिगत बहुत बड़ी उपलब्धि थी कि उनका व्यवहार उनके कार्यों से कहीं अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है।
दिल्ली की गीता कॉलोनी के दिनेश चंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह ने जितना बड़ा काम किया, उसी का परिणाम है कि आज भारत की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ बनी हुई है, देश विकास कर रहा है और आज हम दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक ताकतों में शामिल हो चुके हैं। लेकिन उन्हें मनमोहन सिंह का मृदुभाषी होना उनका सबसे अच्छा पहलू लगता है। आज के राजनीतिक माहौल में जिस तरह की कटुता नेताओं और विभिन्न पार्टियों के बीच देखी जा रही है, उस दौर में मनमोहन सिंह का व्यक्तित्व ही लोगों को सही राह दिखा सकता है।
इसरार खान ने कहा कि आज के राजनीतिक माहौल में अल्पसंख्यकों को लेकर खुलेआम आज जिस तरह की बातें कही जा रही हैं, उस दौर में मुसलमानों को मनमोहन सिंह जैसे नेता की कमी सदैव खलेगी। वे मुसलमानों के कल्याण को लेकर इतने सतर्क रहते थे कि उनका सबसे पहले विकास करने की बात कहते थे। इसी क्रम में उन्होंने कहा था कि देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला हक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसका यह अर्थ नहीं था कि मनमोहन सिंह संसाधनों पर सबसे पहले किसी एक वर्ग का अधिकार कराना चाहते थे, लेकिन उनके कहने का आशय यही था कि गरीब अल्पसंख्यकों का विकास सबसे पहले होना चाहिए।
सुनील कुमार ने कहा कि एक प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने जो कार्य किया, उसमें सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि उन्होंने मनरेगा योजना के जरिए समाज के उस सबसे गरीब तबके को आर्थिक तौर पर सुरक्षित करने का काम किया जो देश की योजनाओं की प्राथमिकता में कभी सीधे तौर पर नहीं आता। उन्होंने कहा कि इसी तरह उन्होंने देश की करोड़ों की आबादी के कल्याण का रास्ता एक योजना से तैयार कर दिया था।
पहले बाधा, लेकिन बाद में मिली छूट
निगमबोध घाट पर सर्वोच्च स्तर के नेताओं-अधिकारियों की उपस्थिति के कारण पूरे निगमबोध घाट पर सुरक्षा का घेरा बहुत कड़ा कर दिया गया था। निगमबोध घाट की ओर आने-जाने वाले रास्तों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था जिसके कारण चारों ओर वाहनों का लंबा जाम लग गया था। वीवीआईपी होने के कारण कारण आम लोगों को निगमबोध घाट पर प्रवेश करने में बहुत कठिनाई हुई। इस दौरान सामान्य लोगों को अपने मृत प्रियजनों के अंतिम संस्कार में कुछ बाधा भी आई। लेकिन सभी वीवीआईपी के प्रवेश के बाद जल्द ही लोगों को अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए निगमबोध घाट के अंदर जाने की अनुमति दे दी गई। इसके बाद हजारों की संख्या में लोगों ने घाट पर पहुंचकर मनमोहन सिंह को अंतिम विदाई दी।