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आईने के सामने जाते ही खुद को देखकर डर जाती थी- मनीषा कोइराला

Sat, 15 Sep 2018 08:29 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली 
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अमर उजाला डॉट कॉम के साथ एक विशेष बातचीत में बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने अपनी बीती जिंदगी के कई रहस्यों से पर्दा उठाया।
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कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़कर उसे मात देने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने उन दिनों को याद करते हुए कहा, जब मैं आईने के सामने जाती थी तो खुद को एलियन जैसा पाकर डर जाती थी। सिर के बाल ही नहीं, बल्कि भौंहें भी झड़ गई थीं। जहां भी देखो, नजरों के सामने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परेशानी खड़ी मिलती थी। मन में एक डर भी था कि इलाज सफल होगा या नहीं।

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खैर इन सभी बातों से परे आगे की उम्मीद जिंदा थी। बैठे-बैठे यह भी सोच लिया कि अगर जीवन दोबारा मिला तो उसे एक नए अंदाज में जिऊंगी। हुआ भी वहीं, आज मैं आप सबके सामने एक नए जीवन में और एक नई भूमिका में हूं। कैंसर जैसी बीमारी से बचने के लिए लोगों को जागरूक कर रही ग्रामीण स्नेह फाउंडेशन द्वारा शनिवार को इंडिया हेबिटेट सेंटर में हौसला कॉन्क्लेव-2018 आयोजित किया गया। सिने तारिका मनीषा कोइराला इसी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दिल्ली आईं थीं। उन्होंने अमर उजाला डॉट कॉम के साथ एक विशेष बातचीत में अपनी बीती जिंदगी के कई रहस्यों से पर्दा उठाया।

कीमो थेरेपी को विटामिन शॉट मानकर लिया
मनीषा जब कैंसर से जूझ रही थी तो कीमो थेरेपी लेनी पड़ती थी। शुरू में इससे असहनीय पीड़ा भी हुई। जब भी कीमो का नंबर आता तो मन में डर उठने लगता था। बतौर मनीषा, कुछ दिन बाद मेरे एक दोस्त की बहन जो कैंसर से लड़ने के बाद स्वस्थ जीवन जी रही थी, उसने मुझसे कहा, तुम कीमोथेरेपी को विटामिन शॉट मानकर लिया करो। चूंकि विटामिन तो फायदा ही पहुंचाता है, इसलिए मैंने भी यही सोच लिया कि यह विटामिन ही कैंसर को खत्म करेगा। अत: इसे लेने में मन को दुखी नहीं करना चाहिए।

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क्या वही चमक-धमक वापस लौटेगी, इसे लेकर डर भी था और नर्वस भी रही

जब कैंसर से ठीक होने लगी तो मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे। जैसे, जीवन में दोबारा से पहले वाली चमक-धमक वापस लौटेगी या नहीं। इसे लेकर बहुत नर्वस रही। हालांकि बाद में बहुत कुछ पहले जैसा ही हो गया। लोगों का प्यार मिला, प्रोत्साहन मिला। इन सबकी वजह से मुझमे साहस और विश्वास बढ़ गया। मैं फिर से पहले वाली जिंदगी में आने लगी। इसमें भी दो बातें रही। मैं सोचती थी कि जो गया सो गया। अब वह वापस नहीं आएगा। जो हमारे पास है, उसे लेकर आगे बढ़ना है। ये एक बड़ी सच्चाई है कि इंसान के पास जो कुछ है, उसे आधार बनाकर ही आगे बढ़ना चाहिए।

कई अपने पीछे हट गए तो कुछ नए लोगों ने हाथ थाम लिया
इस सवाल के जवाब में, कि बीमारी की स्थिति में कुछ लोग ऐसे भी रहे होंगे, जिन्होंने साथ छोड़ दिया होगा। मनीषा बोली, हां यह सही है। उस दौर में कई अपने पीछे हट गए थे। अच्छी बात यह रही कि कुछ नए लोग साथ आ गए। उन्होंने जीवन की उम्मीद दिखाई। हर तरह से मदद की और आगे बढ़ने का हौसला दिया। खास बात यह रही कि कई ऐसे लोग साथ आए, जिनसे उम्मीद ही नहीं थी। इन बातों से बहुत कुछ सिखा दिया। ठीक होने के बाद मैं लगातार कैंसर जागरूकता अभियानों में हिस्सा लेने लगी। मुझे जहां भी लगता कि कैंसर के लिए कहीं कुछ काम हो रहा है तो मैं वहां पहुंच जाती हूं।
 
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महिलाओं को स्तन कैंसर पर तेज नजर रखनी होगी

मनीषा कोइराला ने कहा, यह बात सही है कि देश में स्तन कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीमारी को लेकर महिलाओं को खुद ही सचेत होना होगा। आज देश में इसका इलाज संभव है। बस जरूरत है तो केवल जागरूकता की। महिलाओं को अगर कैंसर का शक भी हो तो तुरंत डॉक्टर के पास चली जाएं। कई जगहों पर देखने को मिलता है कि शर्म या झिझक के चलते महिलाएं इस बीमारी को दूसरी-तीसरी स्टेज तक पहुंचा देती हैं। महिलाओं को खानपान का ध्यान रखना होगा।

मंच के सामने बैठी मम्मी ने जब मनीषा को डांटकर कहा, हिंदी में क्यों नहीं बोलती
मंच पर मनीषा बैठी थी और नीचे उनकी मम्मी बैठी थीं। मनीषा ने कई सवालों के जवाब हिंदी में ही दिए, लेकिन बीच-बीच में वह अंग्रेजी का इस्तेमाल कर रही थी। इस बात पर सामने बैठी मम्मी ने मनीषा को न केवल टोका, बल्कि उन्हें डांट भी दिया। मम्मी ने कहा, हिंदी क्यों नहीं मिलती। मनीषा ने तुरंत सॉरी बोला और हिंदी में अपनी बात कहने लगी। बाद में सिने तारिका ने बताया कि मम्मी उसे बहुत प्यार करती हैं। जब मैं कैंसर से जूझ रही थी तो मम्मी मेरे सामने ऐसा व्यवहार करती थी कि जैसे सब कुछ ठीक है। उसके बाद वे दूसरे कमरे में जाकर खूब रोती थी। 
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