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पार्टी में कोई कुछ गलत करेगा, उसे निकाल फेंका जाएगा: मनीष सिसोदिया

Mon, 02 Jan 2017 02:41 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Amar ujala
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दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्वीकार किया है कि दिल्ली के तमाम सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार अब भी मौजूद है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों की काया पलट करने में जुटे मनीष मानते हैं कि देश में शिक्षा मंत्रालय खत्म कर मानव संसाधन मंत्रालय बनाना एक गंभीर चूक है। वह ये भी मानते हैं कि आवेग से निकली उनकी पार्टी में कुछ गलत लोग भी घुस आए हैं। इनके अलावा तमाम और ज्वलंत मुद्दों पर देखिए दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का पूरा इंटरव्यू, इस बार के शुक्ल पक्ष में। पेश हैं इस इंटरव्यू के कुछ अंश।
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प्रश्न:  हम यहां दिल्ली के एक सरकारी स्कूल में बैठे हुए हैं, आप लगातार शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे है। ये जो मानसिकता है कि हमारा बच्चा पढ़े तो कान्वेंच स्कूल में ही पढ़े तो ये मानसिकता कैसे तोड़ी जा सकती?

मनीष – इस मानसिकता को तोड़ने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की और उसकी टीम की है। पेरेंट्स के अंदर कॉनफिडेंस की कमी है सरकारी स्कूलो को लेकर, मैं या कोई भी आदमी अपने बच्चों को बेस्ट एजूकेशन देना चाहता है। मुझे लगता है कि हमारे देश में जिन लोगों के हाथ में शिक्षा का काम रहा उन्होंने एक बड़ी गलती की कि  गवर्नमेंट स्कूलों के प्रति गिरते भरोसे को संभाला नहीं। सरकारी स्कूलों के शिक्षक कंपटीशन पास करके आते हैं। हमारे पास बहुच अच्छे यूपीएससी से आए प्रिंसिपल बैठे हुए है वो भी टैलेंटेड हैं। हमने स्कूलों के दरवाजे पैरेंट्स के लिए खुलवाए। अब पैरेंट्स सोचने लगें है कि जो प्राइवेट स्कूलों में होता है वो तो अब यहां भी होना लगा है।
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प्र. सरकारी स्कूलों में पैरेंट्स टीचर मीटिंग की शुरुआत का विचार आपको कहां से आया?

मनीष - ये विचार मुझे अपने बच्चे के स्कूल से आया। हर दूसरे तीसरे महीने मुझे वहां से  नोटिस आता है। मेरा बच्चा आठवीं क्लास में पढ़ता है और जब से वो केजी में था तबसे मुझे हर दूसरे तीसरे महीने मुझे नोटिस आता है। मैं कोशिश करता हूं कि मैं हर बार जाऊं। मंत्री बनने के बाद भी मैं कई बार अपने बच्चे की मीटिंग में गया और जब मैं शिक्षा मंत्री होते हुए वहां जाता था तो मुझे लगता था कि जैसे मैं अपने बच्चे की टीचर से बात कर पा रहा हूं। अपने बच्चे का फीड बैक ले पा रहा हूं या दे पा रहा हूं। चर्चा कर पा रहा हूं। ये एक तरह की पार्टनरशिप है। तो वो पाटनरशिप गवर्मेंट स्कूलों क्यूं नहीं जबकि मेहनत वहां भी हो रही तब मैने अपने डिपार्टमेंट के लोगों से बात की। उनको भी आइडिया बहुत अच्छा लगा।
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'हमारे देश में मानव विकास संसाधन मंत्रालय है, शिक्षा मंत्रालय नहीं'

- फोटो : Amar ujala
प्र. आप बताइए अपने समय में आप  की पढ़ाई के समय कैसा संघर्ष रहा?

मनीष- मैं एक गांव में रहता था। वहां एक बहुत छोटा सा प्राइमरी स्कूल था। मैं वहीं जाता था। हम उस तख्ती वाले दौर से निकल के आए है तो वो हमारा प्राइमरी था। मेरे पिता अध्यापक थे। छठी क्लास से बारहवीं क्लास के बच्चों को पढ़ाते थे जो मेरे गांव से सोलह किमी. दूर था, तो सोलह किमी. दूर जाकर मैंने इंटर तक की पढ़ाई की। 16 किमी. हम साइकिल से आते, जाते थे। काफी संघर्ष था लेकिन मुझे उस दौरान सोचने का बहुत मौका मिलता था। 16 किमी. साइकलिंग का मतलब करीब एक घंटा लगता था, पिता जी भी साथ में साइकिल चलाया करते थे। तो मुझे पिताजी के साथ संवाद के लिए बहुत अच्छा टाइम मिलता था।

प्र. – आपको नहीं लगता हमारे यहां बहस व्यक्तियों पर होती है, विचारो पर होती ही नहीं है।

मनीष – जब मैं शिक्षा मंत्रियों की बैठक में गया तो मैंने वहा कहा कि इस देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्री और देश के मानव संसाधन मंत्री सुबह से हम चर्चा कर रहे हैं। हम चर्चा कर रहे हैं कि ये वाला डेटा ग्रीन में चला गया, ये वाला डाटा उसमें चला गया, चार्ट बन रहे हैं। मैने कहा कि ये सब काम तो अफसर भी कर लेते हैं। अगर इस देश की लीडरशिप बैठी है तो शिक्षा पर चर्चा करो। मैंने कहा हमारे देश में मानव विकास संसाधन मंत्रालय है, शिक्षा मंत्रालय नहीं। जिस देश में शिक्षा मंत्रालय न हो, उस देश में मानव संसाधन मंत्रालय का काम शिक्षा मंत्रालय का काम समझा जाता है। गलती यहीं हो गई हमारे यहां शिक्षा का मतलन मानव संसाधन विकास हो गया। मतलब इंजीनियर डॉक्टर बनाना हो गया। शिक्षा उसे कहीं बड़ा काम है।

प्र. इस बात की क्या गारंटी है कि आम आदमी पार्टी जिस ध्येय को लेकर बनी थी और जो उसके मुखिया है, उसे इसी उद्देश्य पर कायम रखेंगे  ताकि आम आदमी पार्टी बस एक और पार्टी बन कर नहीं रह जाए?

मनीष – कोई पहले से जुड़ा हो या आज जुड़ा हो, इस बात की कोई गारंटी नहीं हो सकती कि वो बेइमानी नहीं कर रहा था या नहीं करेगा। कोई कर रहा है तो इसके बारे में थोड़ा पता भी लगा सकते है लेकिन आगे नहीं करेगा इसकी कोई गारंटी नही। और कभी हो भी नहीं  सकती। पर जब कोई आदमी बेइमान होगा, उसके साथ क्या सलूक किया जाएगा? इस बात की गारंटी है। इस पार्टी में जब कोई कुछ गलत करेगा, उसे निकाल फेंका जाएगा, फिर चाहे वो मैं हूं या अरविंद केजरीवाल हो।

ये पूरा वीडियो इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं>

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