हिंसाग्रस्त मणिपुर में धीरे-धीरे शांति लौट रही है। इस बीच मंगलवार को कांगपोकपी जिले के चम्फाई सब डिवीजन में कीथेलमनबी मिलिट्री कॉलोनी में हजारों कुकी ने रैली और धरना दिया। केंद्र सरकार को पहले समाधान, फिर शांति के अपने सर्वसम्मत रुख से अवगत कराया। कुकी प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कोई भी समाधान यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (यूपीएफ) और कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन (केएनओ) के बीच भारत सरकार और मणिपुर सरकार के बीच राजनीतिक वार्ता पर आधारित होना चाहिए।
विरोध के दौरान कुकी समुदाय ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे सरकार द्वारा शुरू की गई किसी भी शांति प्रक्रिया को तब तक स्वीकार नहीं करेंगे, जब तक कि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता और समाधान नहीं दिया जाता। जनजातीय एकता समिति, सदर हिल्स ने कुकी लोगों की पीड़ा और शिकायतों को दूर किए बिना शांति पर सरकार के जोर पर अपनी निराशा व्यक्त की।
कांगपोकपी जिले में राहत शिविरों में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए, जनजातीय एकता समिति के एक सदस्य ने भोजन, कपड़े, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया। रैली में यूपीएफ केएनओ और सरकारों के बीच राजनीतिक संवाद पर आधारित समाधान की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
रैली में लोगों ने मुख्यमंत्री पर केवल मैतेई लोगों के लिए काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर मणिपुर के मुख्यमंत्री सभी के होते तो यह हिंसा रूक चुकी होती। मैतेई लोगों ने कुकी लोगों पर हमला किया। मुख्यमंत्री का चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि सेना, असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस केवल मैतेई लोगों की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि हिंदी का विरोध करने वाले कैसे देश भक्त हो सकते हैं। कुकी लोगों ने देश की आजादी के लिए अपना जीवन लगा दिया। नतेजी सुभाषचंद्र बोस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की आजादी के लिए लड़ाइयां लड़ीं।
सुरक्षा सलाहकार ने किया चुराचांदपुर जिले का दौरा
इस बीच मणिपुर के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह ने मंगलवार को चुराचांदपुर जिले का दौरा किया। इस दौरान हजारों लोग सड़कों पर तख्ती लेकर खड़े थे। उन्होंने मणिपुर से अलग एडमिनिस्ट्रेशन की मांग की। इस दौरान सड़कों की दोनों ओर भारी संख्या में लोग थे। लोगों ने हम अलग प्रशासन चाहते हैं, के नारे लगाए। लॉन्ग लिव इंडिया" के नारे भी लगाए गए।
वर्ल्ड मैतेई काउंसिल ने तीन मांगे रखीं
वर्ल्ड मैतेई काउंसिल के प्रवक्ता ने नाबाकिशोर ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा है कि मणिपुर सरकार मूल लोगों की रक्षा करने में पूरी तरह से नाकाम रही। मैतेई अपनी ही जगह पर असुरक्षित हैं। मैतेई मणिपुर के केवल दस प्रतिशत हिस्से में रहते हैं। बाहर से आए कुकी-चिन हैं के चलते मणिपुर का पूरा भौगोलिक स्थिति बदल गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से तीन मांगे रखीं।
उन्होंने कहा कि मैतेई को एसटी का दर्जा दिया जाए। इससे ही मैतेई समुदाय बच सकती है। बाहर से आकर जो लोग मूल निवासियों पर अत्याचार कर रहे हैं। आतंकवादियों के साथ जुड़े हुए हैं, अफीम की खेती कर रहे हैं, उनको एनआरसी के तहत पहचान करके बाहर किया जाए। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जो कुकी आंतकवादी जो खुद को सस्पेंशन ऑपरेशन कहते हैं, लेकिन हिंसा में शामिल हैं। इन पर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का आंतकवादियों पर कोई काबू नहीं है।
सेना ने दमकल कर्मियों के आरोपों को सिरे से खारिज किया
इस बीच मंगलवार को इंफाल में दमकल कर्मियों ने सेना द्वारा उनके कर्मियों के साथ का आरोप लगाकर धरने पर बैठ गए। दमकल कर्मियों ने आरोप लगाया कि सोमवार को मणिपुर में आगजनी के वक्त सेना के जवानों ने कुछ दमकल कर्मियों के साथ मारपीट की, जबकि रक्षा प्रवक्ता ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। सेना के बयान के मुताबिक सेना ने तो समय रहते आग पर काबू पाने में तुरंत कार्रवाई की।