मणिपुर हिंसा मामले में तीन महिला जजों की समिति ने लोगों के नष्ट दस्तावेज को फिर से जारी करने, मुआवजा राशि बढ़ाने और योजना को अपडेट करने तथा डोमेन विशेषज्ञों की नियुक्ति करने का सुझाव दिया है। समिति ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी।
चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि समिति ने मुआवजे, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, चिकित्सा स्वास्थ्य देखभाल, राहत शिविर, डाटा रिपोर्टिंग और निगरानी जैसे कई मुद्दों के तहत मामलों को विभाजित किया है। पीठ मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगी। कोर्ट ने माना कि प्रशासनिक सहायता प्रदान करने, समिति को धन आवंटित करने और समिति के काम को प्रचारित करने के लिए कुछ निर्देश आवश्यक होंगे।
रिपोर्ट में उठाए गए ये मुद्दे
रिपोर्ट में हिंसा के दौरान घर खोने वाले लोगों के जरूरी दस्तावेज फिर से उपलब्ध कराना अहम मुद्दा बताया गया है। इसके लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति की मांग की गई है, जो आधार कार्ड जैसे अहम पहचान दस्तावेज को फिर उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान करें। पीड़ित मुआवजा योजना में अन्य योजनाओं के लाभार्थियों को भी शामिल करने की सिफारिश की गई है। मौजूदा योजना में अन्य योजनाओं का लाभ पाने वाले पीड़ितों को मुआवजे का लाभ नहीं मिल रहा है।
पुनर्वास उपायों पर देनी थी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों की तीन सदस्यीय समिति की स्थापना की थी। इसमें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गीता मित्तल, बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिनी फंसलकर जोशी और दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आशा मेनन शामिल हैं। समिति को मणिपुर में पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने, उपचारात्मक व पुनर्वास उपायों समेत मानवीय पहलुओं पर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह 25 अगस्त को जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली कमेटी को समुचित कामकाज की सुविधा देने के लिए आदेश पारित करेंगे। कमेटी को प्रशासनिक मदद मिलने और इसके वित्तीय खर्चों को पूरा करने के लिए दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस के पूर्व चीफ दत्तात्रेय पदसालगिकर को मणिपुर में आपराधिक मामलों की जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया था। यह रिपोर्ट भी जल्द सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी। बता दें कि मणिपुर में जनजातीय आरक्षण की मांग को लेकर बीती तीन मई को हिंसा भड़की थी। इस हिंसा में अभी तक सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं।