मणिपुर से राज्यसभा सदस्य लीशेम्बा सनाजाओबा ने रविवार को मिजोरम के सांसद के वनलालवेना पर निशाना साधा। लीशेम्बा ने सांसद वनलालवेना को चेतावनी दी कि उन्हें मणिपुर के मुद्दों में हस्तक्षेप करने के लिए सीमा पार नहीं करना चाहिए।
भाजपा के सहयोगी मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के नेता वनलालवेना ने मणिपुर में जातीय हिंसा को रोकने के लिए मैतेई और कुकी-जो समुदाय के लिए अलग प्रशासनिक इकाइयां बनाने की बात की थी। उन्होंने मणिपुर की एन बीरेन सिंह सरकार को हटाकर राष्ट्रपति शासन लगाने का भी सुझाव दिया, ताकि हिंसा को रोका जा सके।
वनलालवेना की टिप्पणियों की एक समाचार रिपोर्ट साझा कर सनाजाओबा ने एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, 'मेरे दोस्त, सीमा पार मत करो। कृपया अपने राज्य के मुद्दों तक ही सीमित रहें। मणिपुर के मुद्दों में हस्तक्षेप बंद करें और एक अच्छे पड़ोसी बनें।'
राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग
सांसद वनलालवेना ने एक साक्षात्कार में कहा कि हिंसा को रोकने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाना बहुत जरूरी है। इसके दौरान केंद्र को स्थिति का गहन अध्ययन करना चाहिए और मैतेई और आदिवासी समुदायों के कब्जे वाली जमीन का सीमांकन करना चाहिए। बता दें कि मई 2023 से मणिपुर में शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
अलग प्रशासन इकाईयों के गठन पर दिया जोर
सांसद वनलालवेना ने हिंसा रोकने के लिए दूसरे कदम के तौर पर दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों के गठन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों समुदायों को अलग-अलग प्रशासनिक इकाइयों के तहत चलाना चाहिए, क्योंकि उनकी जमीन और जीवनशैली के बीच बहुत फर्क है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी जनजातियां अब घाटी में नहीं जा सकतीं और मैतेई लोग पहाड़ी इलाकों में नहीं जाना चाहते। दोनों समुदायों के बीच नए प्रशासनिक इकाइयां बनाई जानी चाहिए ताकि स्थायी समाधान संभव हो सके और संघर्ष खत्म हो सके।
हिंसा अब राज्य सरकार के नियत्रंण से बाहर
मिजोरम नेशनल फ्रंट के नेता ने आगे मणिपुर सरकार पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हुए कहा कि मणिपुर में जातीय हिंसा अब राज्य सरकार और पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। उनका मानना है कि राष्ट्रपति शासन से ही स्थिति सुधरेगी, लेकिन इसके साथ ही दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रशासन जरूरी है।
संबंधित वीडियो