मणिपुर के लिए अगले '240' घंटे बहुत अहम हैं। हिंसा से प्रभावित राज्य में कुछ बड़ा होने की आहट सुनाई पड़ रही है। केंद्र सरकार ने मणिपुर में विद्रोहियों एवं दूसरे अपराधियों से निपटने के लिए सख्त कदम अख्तियार करने का मन बना लिया है। नवंबर माह के दौरान अभी तक मणिपुर में 20 लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य में अर्धसैनिक बलों की 70 कंपनियां, यानी 7000 जवानों को रवाना कर दिया है। ये सभी जवान 30 नवंबर तक राज्य में तैनात रहेंगे। खास बात है कि मौजूदा समय में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 288 कंपनियां तैनात हैं। इन्हें भी 30 नवंबर तक तैनाती का आदेश मिला है।
सूत्रों के अनुसार, इस बार केंद्र सरकार मणिपुर में बड़े एक्शन प्लान की तैयारी कर रही है। शांति स्थापित करने के लिए राज्य सरकार की तरफ से भी केंद्र पर भारी दबाव है। देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' को लीड रोल में रखा जा रहा है। विद्रोहियों और हिंसक वारदातों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। म्यांमार से लगती सीमा पर बड़ा सर्च अभियान चलेगा। घाटी के विभिन्न हिस्सों और बफर जोन के आसपास ऑपरेशन शुरु होगा।
मणिपुर में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त 70 कंपनियां पहुंचने के साथ ही अब वहां पर सीएपीएफ की कुल 288 कंपनियां तैनात हैं। इन सभी कंपनियों को 30 नवंबर तक मणिपुर में ही रहने का आदेश मिला है। सूत्र बताते हैं कि अगले 10 दिन मणिपुर के लिए बहुत अहम हैं। मणिपुर में अब सीआरपीएफ की 165 कंपनियां तैनात हैं। आरएएफ की आठ कंपनियां पहले से ही राज्य में मौजूद हैं। बीएसएफ की 104 कंपनियां मोर्चा संभाल रही हैं। आईटीबीपी की पांच और एसएसबी की छह कंपनियां, मणिपुर में तैनात हैं।
सोमवार को ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर में 70 अतिरिक्त कंपनियां भेजने का आदेश जारी किया था। इनमें सीआरपीएफ की 50 और बीएसएफ की 20 कंपनियां शामिल हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की इन कंपनियों को भी 30 नवंबर तक मणिपुर में तैनाती का आदेश मिला है। मणिपुर में सात नवंबर से लेकर अब तक लगभग बीस लोगों की मौत हो चुकी है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में हिंसा और आगजनी की वारदात हो रही हैं। गुस्से में आए लोगों ने मुख्यमंत्री एवं दस विधायकों के घरों को भी नहीं बख्शा। नतीजा, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 14 नवंबर को इंफाल पश्चिम जिले में सेकमाई व लामसांग, इंफाल पूर्व में लामलाई, बिष्णुपुर में मोइरांग, कांगपोकपी में लीमाखोंग और जिरीबाम जिले में जिरीबाम के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम 'अफ्स्पा' लागू कर दिया गया है। सीआरपीएफ डीजी अनीश दयाल सिंह मणिपुर पहुंच चुके हैं। राज्य सरकार ने केंद्र से अनुरोध किया है जिन क्षेत्रों में 'अफ्स्पा' लागू किया है, उसे वापस लिया जाए।
सेना, असम राइफल और सीएपीएफ के जवान, बॉर्डर के निकटवर्ती क्षेत्रों में छापामारी करेंगे। बाकी सुरक्षा बल, अंदर के क्षेत्रों में उपद्रवियों से निपटेंगे। मणिपुर में सीआरपीएफ जवानों को ड्रोन गन प्रदान की गई हैं। इसकी मदद से ड्रोन या मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) को जाम किया जा सकता है। मणिपुर में कुछ माह पहले घुसपैठियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया था। भारत-म्यांमार के बीच 1610 किमी लंबे बॉर्डर को सील करने के मकसद से हैवी फेंसिंग लगाने का काम शुरु किया गया है। इससे घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी। पहले चरण में मोरेह के ऊपर लगभग 10 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लगाने के अलावा एक अन्य स्थान पर 21 किलोमीटर की सीमा पर, बाड़ लगाने का काम प्रारंभ हो चुका है।