सुरक्षाबलों ने मणिपुर में विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों के नौ उग्रवादियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रतिबंधित कांगलेई यावोल कन्ना लूप (केवाईकेएल) के तीन सक्रिय कार्यकर्ताओं को जबरन वसूली गतिविधियों में शामिल होने के आरोप में बृहस्पतिवार को बिष्णुपुर जिले के लीमापोकपम से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि उनके पास से हथियार और गोला बारूद बरामद किया गया।
अधिकारी ने कहा कि सुरक्षाबलों ने शुक्रवार को टेंग्नौपाल जिले के गंगपीजांग गांव (बीपी-74) से प्रतिबंधित पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के तीन काडर और प्रतिबंधित कंगलेईपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया। प्रतिबंधित केसीपी (पीडब्ल्यूजी) के एक सक्रिय काडर को गुरुवार को इंफाल पश्चिमी जिले के युमनाम हुइड्रोम इलाके से गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने बताया कि उस पर घाटी के इलाकों में जबरन वसूली की गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। अधिकारी ने कहा कि राज्य में जबरन वसूली की गतिविधियों में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए खुफिया जानकारी के आधार पर तलाश अभियान बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि तलाश अभियान के दौरान शुक्रवार को चुराचांदपुर जिले के डंपी हिल वन क्षेत्र से तीन आग्नेयास्त्र, एक मोर्टार, एक रेडियो सेट और दो चार्जर बरामद किए गए।
कुकी समूहों ने की मणिपुर में बफर जोन बनाए रखने की मांग
इसी बीच, कुकी समूहों ने शनिवार को मांग की कि जब तक कोई व्यापक राजनीतिक समाधान नहीं निकलता (जैसे कि विधानमंडल सहित एक केंद्र शासित प्रदेश) तब तक मणिपुर में बफर जोन को एक रक्षात्मक उपाय के रूप में बनाए रखा जाए।
कुकी-जो महिला मंच की सह-संयोजक चोंग हाओकिप ने मणिपुर से एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की मांग दोहराई। उन्होंने कहा, यह किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि कुकी लोगों की सुरक्षा और अस्तित्व के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए एक आवश्यक कदम है।
इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि शांति और सुरक्षा की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। हाओकिप ने आरोप लगाया कि इंफाल से कुकी-जो जनजातियों को खदेड़ा गया, जानवरों की तरह मारा गया। हमें साथ दुश्मन की तरह बर्ताव किया गया। हमारी पहचान के कारण हमें मारा गया और सुरक्षा बलों ने समय पर हस्तक्षेप नहीं किया। सरकार हमें बचा सकती थी, लेकिन उसने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि जो लोग सालों से इंफाल में रह रहे थे, उन्हें भी विस्थापित कर दिया गया और पुलिस की मौजूदगी के बावजूद लोग मारे गए। हाओकिप ने कहा कि उन्हें भेदभाव और हिंसा के कारण अलग प्रशासन की मांग करने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कुकी महिलाओं के खिलाफ हिंसा का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराई गई और पुलिस ने कुछ नहीं किया।
गौरतलब है कि मणिपुर में दो साल पहले जातीय हिंसा भड़कने के बाद से सुरक्षाबल तलाश अभियान चला रहे हैं। मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 260 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था। केन्द्र सरकार ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया था, जब मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया गया है।