मणिपुर में एक बार फिर राजनीतिक गतिविधियां निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही हैं। राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त होने से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर स्पष्ट संकेत देते हुए पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ को राज्य का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विधायकों को दिल्ली बुलाकर सरकार गठन की संभावनाओं पर गहन मंथन शुरू कर दिया गया है। सियासी गलियारों में इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भाजपा राज्य में लोकप्रिय सरकार के गठन की दिशा में अब अंतिम चरण में प्रवेश कर चुकी है।
हालांकि, सरकार गठन की राह में सबसे बड़ी अड़चन कुकी विधायकों का रुख बना हुआ है। भाजपा के कुकी विधायक फिलहाल भविष्य की सरकार में शामिल होने को लेकर खुलकर सहमत नहीं दिख रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, कुकी समुदाय के भीतर भारी दबाव के चलते वे केंद्र सरकार से विधानसभा सहित अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग पर ठोस और सार्वजनिक आश्वासन चाहते हैं। जब तक इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता, तब तक उनका समर्थन अनिश्चित बना रह सकता है।
इसके विपरीत, नगा विधायकों का रुख अपेक्षाकृत व्यावहारिक बताया जा रहा है। नगा पीपुल्स फ्रंट से जुड़े नेताओं का मानना है कि लगातार राष्ट्रपति शासन राज्य के विकास, प्रशासन और राजनीतिक स्थिरता के लिए नुकसानदेह है। वे सरकार गठन के पक्ष में हैं, बशर्ते नई व्यवस्था सभी समुदायों के हितों को साथ लेकर चले।
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भाजपा के भीतर मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी मंथन तेज हो गया है। एक ओर एन. बीरेन सिंह का प्रशासनिक अनुभव और संगठन पर पकड़ है, वहीं दूसरी ओर पार्टी नए चेहरे के जरिए नई शुरुआत और नया संदेश देने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अंतिम फैसला इस आधार पर होगा कि कौन सा नेतृत्व मैतेई, कुकी और नगा—तीनों समुदायों के बीच संवाद और भरोसे की बहाली कर सकता है।
सरकार गठन की राह में क्या हैं प्रमुख अड़चनें?
मौजूदा परिस्थितियों में मणिपुर के सामने आगे क्या रास्ता?
राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने हालात सामान्य करने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें सुरक्षा बलों से लूटे गए हथियारों को सरेंडर कराने जैसे निर्देश भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि मई 2023 में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है, जिससे राज्य की सामाजिक संरचना गहरे संकट से गुजर रही है।