मणिपुर में विधानसभा का शीतकालीन सत्र न बुलाए जाने पर कांग्रेस लगातार राज्य सरकार पर हमला बोल रही है। उसका आारोप है कि राज्य सरकार ने विधानसभा का शीतकालीन सत्र न बुलाकर संविधानिक नियमों का उल्लंघन किया है। हालांकि, कानून मंत्री थौनाओजम बसंत कुमार सिंह ने मंगलवार को उसके सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया।
कानून मंत्री ने कही ये बात
मंत्री ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 174 के अनुसार, राज्य की विधानमंडल की बैठक कम से कम दो बार साल में बुलानी चाहिए और पिछले सत्र तथा अगले सत्र के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बजट सत्र और शरदकालीन सत्र पहले ही आयोजित किए जा चुके हैं।
संविधान के नियमों का उल्लंघन का आरोप गलत
उन्होंने आगे कहा, 'मणिपुर कांग्रेस का यह आरोप कि संविधान के नियमों का उल्लंघन हुआ है, गलत है। ओकरम इबोबी सिंह के 2002 से 2016 तक मुख्यमंत्री रहते हुए पांच बार ऐसा हुआ जब विधानसभा सत्र एक कैलेंडर वर्ष में केवल दो बार बुलाए गए थे। भाजपा सरकार के तहत संविधान का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।'
कुमार की यह टिप्पणी कांग्रेस विधायक दल के नेता ओ इबोबी सिंह के उन हालिया आरोपों के मद्देनजर आई है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा नीत सरकार ने विधानसभा का शीतकालीन सत्र नहीं बुलाकर संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
इसलिए नहीं बुलाए गए सत्र
कानून मंत्री ने कहा कि मणिपुर सरकार ने हमेशा संविधान की अनिवार्य प्रावधानों और मणिपुर विधानमंडल द्वारा बनाए गए नियमों को लागू करने की कोशिश की है। सामान्य समय में, सरकार ने 2017 से 2020 के बीच तीन बार विधानसभा सत्र बुलाए थे। उन्होंने कोविड-19 महामारी और पिछले साल तीन मई को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना का जिक्र करते हुए कहा कि इन परिस्थितियों के कारण राज्य सरकार ने आवश्यक सत्र नहीं बुलाए, क्योंकि जनता को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
इस बीच, बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन मणिपुर (BOSEM) के कर्मचारियों द्वारा आक्रोशित विरोध के दौरान कुमार ने कहा कि अखम जोयकुमार सिंह को चेयरमैन के रूप में नियुक्त किया गया है और यह नियुक्ति नियमों के तहत की गई है। उन्होंने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि यह छात्रों के हित में होगा।