मणिपुर के लीमाखोंग कैंप से 25 नवंबर को लापता हुए 56 साल के लैशराम को सेना और पुलिस के हजारों जवान मिलकर खोज रहे हैं। मणिपुर पुलिस ने बताया था कि लैशराम का पता लगाने के लिए वह हेलीकॉप्टरों, ड्रोन और सेना के ट्रैकर कुत्तों की मदद ले रही है। इसके लिए टेक्नोलॉजी का सहारा भी लिया जा रहा है। फिर भी व्यक्ति का कुछ पता नहीं लग रहा है। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए चार सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दिया है।
11 दिसंबर को पेश करनी होगी रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश डी कृष्णकुमार और न्यायमूर्ति गोलमेई गैफुलसिलु काबुई की खंडपीठ ने मंगलवार को सुझाव दिया कि कांगपोकपी जिले के जिला मजिस्ट्रेट, कांगपोकपी के पुलिस अधीक्षक, इंफाल पश्चिम के पुलिस अधीक्षक और 57 माउंटेन डिवीजन के कमांडिंग अधिकारी की एक समिति गठित की जाए और एक रिपोर्ट तैयार करे। अदालत ने आदेश दिया कि 11 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर समिति अदालत के समक्ष एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
अपहरण या खुद कही चला गया शख्स?
पीठ ने कहा कि समिति की अध्यक्षता जिला मजिस्ट्रेट करेगा। वह लापता शख्स के संबंध में जांच करेगी। साथ ही यह पता लगाएगी कि शख्स का शिविर से अपहरण तो नहीं कर लिया गया या वह खुद से कही चला गया है। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता का परिवार उनके पास उपलब्ध किसी भी सामग्री या रिकॉर्ड को पेश करने के लिए समिति के साथ सहयोग करेगा और समिति के प्रमुख याचिकाकर्ता के परिवार के सदस्यों को जांच के लिए समिति के समक्ष पेश होने के लिए नोटिस देंगे।
जिस आर्मी कैंप से गायब हुए लैशराम, वह कुकी बहुल इलाका
कांगपोकपी जिले में बना 57वें माउंटेन डिवीजन लीमाखोंग आर्मी कैंप राजधानी इंफाल से लगभग 16 किमी दूर है और पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह एक कुकी बहुल इलाका है। लैशराम, अपने परिवार के साथ इंफाल पश्चिम के खुखरुल में रहते थे। पिछले साल मई में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद लीमाखोंग के पास रहने वाले मैतेई लोग भाग गए थे, जिनमें अब तक 250 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
क्या हुआ था 25 नवंबर को?
असम के कछार में उधारबोंड के गोसाईपुर रहने वाले लैशराम कमलबाबू सिंह, मेसर्स एल बिनोद कंस्ट्रक्शन में सुपरवाइजर के रूप में काम करते थे। लैशराम 25 नवंबर को रोज की तरह लीमाखोंग आर्मी कैंप के अंदर काम कर रहे थे। लेकिन उसके बाद लापता हो गए। 57 माउंटेन डिवीजन के गेट लॉग से पता चला कि वह कैंप में दाखिल हुए थे लेकिन बाहर नहीं निकले।
सीसीटीवी फुटेज से यह साबित हुआ कि 25 नवंबर की सुबह करीब 9:15 बजे लैशराम कैंप में दाखिल हुए लेकिन उन्हें बाहर निकलते नहीं देखा गया। आमतौर पर लैशराम शाम 4 बजे तक घर लौट आते थे, लेकिन जब वह रात 8:30 बजे तक नहीं आए और फोन पर भी उनसे संपर्क नहीं हो पाया, तो उनके परिवार ने पुलिस को खबर की।
सिंह के लापता होने के बाद विरोध में बनाई गई संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) ने सैन्य स्टेशन से लगभग 2.5 किमी दूर कांटो सबल में अपना धरना जारी रखा है। यहां सड़क पर बैरिकेडिंग की गई है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सिंह को कुकी उग्रवादियों ने किडनैप कर लिया है। लैशराम सिंह की पत्नी अकोईजम बेलारानी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुईं।