मणिपुर की राज्यपाल अनुसुइया उइके ने राज्य में मौजूदा हालात के बीच राज्य सरकार को 'काम नहीं, वेतन नहीं' आदेश की समीक्षा करने की सलाह दी है। पिछले महीने राज्य सरकार ने अपने उन कर्मचारियों के लिए 'काम नहीं तो वेतन नहीं' नियम लागू किया था, जो 3 मई को जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से बिना अधिकृत छुट्टियों के ऑफिस नहीं आ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल ने मंगलवार को इंफाल के राजभवन में राज्य के मुख्य सचिव डॉ. विनीत जोशी और मणिपुर सरकार के सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह के साथ बैठक के दौरान सरकार को आदेश की समीक्षा करने की सलाह दी। इस दौरान दोनों ही अधिकारियों ने राज्यपाल को जातीय संघर्ष से उत्पन्न राज्य की नवीनतम कानून व्यवस्था की स्थिति से भी अवगत कराया।
सूत्रों के मुताबिक, बैठक के दौरान राज्यपाल उइके ने सभी संबंधित हितधारकों को शामिल करते हुए सौहार्दपूर्ण बातचीत के माध्यम से शांतिपूर्ण स्थिति लाने के तरीकों और साधनों का पता लगाने के लिए उनके साथ इस मुद्दे पर भी चर्चा की।
राज्यपाल उइके ने उन्हें त्वरित कार्रवाई करने और निगरानी समिति की साप्ताहिक बैठक बुलाकर की गई कार्रवाई और आने वाली समस्याओं पर फीडबैक लेने को कहा। साथ ही उन्होंने किसानों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने और कृषि गतिविधियों की व्यवस्था को सुचारू करने की सलाह दी।
उन्होंने सरकार से विस्थापित मेडिकल छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में सीटों की उपलब्धता के अनुसार समायोजित करने की भी सलाह दी। उन्होंने राहत शिविरों में रह रहे लोगों के लिए पर्याप्त दवाओं की आपूर्ति के लिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) से संपर्क करने को कहा है।