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Manipur violence: मणिपुर के सीएम ने मिजोरम के मुख्यमंत्री से की बात, मुद्दे को हल करने के लिए मांगी सहायता

Sun, 18 Jun 2023 05:42 PM IST
देव कश्यप एएनआई, इंफाल।

सार

मिजोरम के सीएम जोरामथंगा ने ट्वीट कर बताया कि मैंने मणिपुर के मुख्यमंत्री को यह कहते हुए आश्वासन दिया कि मिजोरम सरकार जारी हिंसा पर दुख जताती है और हमने इसे कम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं और उपाय किए हैं। 
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मणिपुर के सीएम एन बीरेन सिंह ने मिजोरम के सीएम जोरामथंगा से की बात। - फोटो : Twitter@ZoramthangaCM
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विस्तार
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मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने मणिपुर में चल रही हिंसा के संबंध में रविवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा से बात की। बातचीत के दौरान बीरेने सिंह ने इस उम्मीद के साथ जोरामथंगा से सहायता मांगी कि इस मुद्दे को हल करने में आगे से दोनों की मौजूदगी शांतिपूर्ण तरीके से होगी।

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मिजोरम के सीएम जोरामथंगा ने ट्वीट कर बताया कि मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने दोपहर 12:30 बजे मुझसे फोन पर बात की; मणिपुर में चल रही हिंसा के बारे में इस उम्मीद के साथ इस मुद्दे को हल करने में मेरी सहायता मांग रहे हैं कि अब से दोनों की मौजूदगी शांतिपूर्ण तरीके से होगी। इसके अलावा, अनुरोध है कि मिजोरम मैतेई समुदाय को शांतिपूर्वक व्यवस्थित करने के लिए साधन और उपाय किए जाएं। मैंने मणिपुर के मुख्यमंत्री को यह कहते हुए आश्वासन दिया कि मिजोरम सरकार जारी हिंसा पर दुख जताती है और हमने इसे कम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं और उपाय किए हैं। 

जोरामथंगा ने अपने ट्वीट में कहा, मैंने उनसे आगे कहा कि हम मणिपुर और केंद्र सरकार के द्वारा उठाए गए कदमों का समर्थन करते हैं। मैंने मणिपुर के मुख्यमंत्री को भी इस बात से अवगत कराया कि हम मिजोरम के लोग मैतेई समुदाय के प्रति सहानुभूति रखते हैं और यह कि हमारी सरकार और एनजीओ ने शांति और सुरक्षा के लिए उपाय किए हैं।इसलिए, मिजोरम में रहने वाले मैतेई के लिए, जब तक वे मिजोरम में हैं उन्हें डरने की कोई जरूरत नहीं है। हम उनकी सुरक्षा और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।
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बता दें कि मणिपुर में 100 से अधिक लोग जातीय हिंसा में अपनी जान गंवा चुके हैं। यहां बीते एक महीने से अधिक समय से तनाव और हिंसा की स्थिति बनी हुई है। यहां मेइती समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की इसकी मांग के विरोध में मणिपुर के पर्वतीय जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च आयोजित किए जाने के बाद पहली बार तीन मई को झड़प हुई थी।
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