सूत्रो के अनुसार राज्य में अर्धसैनिक और केंद्रीय बलों के करीब 10,000 जवानों को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा कि राज्य में शांति स्थारित करने के लिए विधानसभा क्षेत्रों में शांति समितियों का गठन किया जाएगा।
मणिपुर के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में लगे कर्फ्यू से स्थानीय लोगों रविवार को कुछ घंटों के लिए छुटकारा मिला। कर्फ्यू के दौरान इन चंद घंटों की छूट में आम जनजीवन वापस पटरी पर लौटता हुआ दिख रहा था। सेना ड्रोन और हेलिकॉप्टर से निगरानी रख रही थी।
विज्ञापन
अधिकारियों ने बताया की चुराचंद जिले में सुबह सात से दस बजे के बीच कर्फ्यू में छूट दी गई थी। इस दौरान खाद्य समान, दवाईयां और अन्य जरुरत की सामान लेने के लिए घरों से बाहर निकले। दस बजे के बाद असम राइफल्स और भारतीय सेना ने राज्य में फेलैग मार्च निकाला।
सूत्रो के अनुसार राज्य में अर्धसैनिक और केंद्रीय बलों के करीब 10,000 जवानों को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने कहा कि राज्य में शांति स्थारित करने के लिए विधानसभा क्षेत्रों में शांति समितियों का गठन किया जाएगा। रक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अबतक करीब 23,000 लोगों को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित जगहों पर स्तानांतरित किया गया है।
विज्ञापन
महाराष्ट्र के छात्रों को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों से बाहर निकलने के लिए विशेष विमान भेजेगी शिंदे सरकार
चुराचंदपुर में कर्फ्यू के बीच शनिवार को भी दोपहर तीन से पांच बजे के बीच दो घंटे की ढील दी गई थी। मुख्यमंत्री सिंह ने राज्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता भी की। इसमें उन्होंने कहा- "राज्य में शांति की अपील करने और सभी नागरिकों को किसी भी ऐसे कृत्य से बचने के लिए प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया गया, जिससे हिंसा या अस्थिरता और बढ़ सकती है।"
इस बैठक में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), जनता दल यूनाइटेड (जदयू), शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), आम आदमी पार्टी (आप) और अन्य राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।
कानून मंत्री ने हिंसाग्रस्त मणिपुर की यात्रा रद्द की
मिजोरम के कानून मंत्री टीजे लालनुंतलुआंगा ने पड़ोसी राज्य सरकार की सलाह पर हिंसाग्रस्त मणिपुर की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी। कानून मंत्री स्थिति का जायजा लेने और वहां फंसे राज्य के लोगों को सुरक्षित निकालने और उनकी निगरानी के लिए लालनुंतलुआंगा पड़ोसी राज्य का दौरा करने वाले थे।
उनके साथ एल. थंगमाविया, विधायक, जो सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के युवा विंग के अध्यक्ष और मिजोरम के सबसे बड़े नागरिक समाज संगठन सेंट्रल यंग मिजो एसोसिएशन (सीवाईएमए) के नेता भी हैं। कानून मंत्री ने बताया कि मणिपुर सरकार की सलाह के बाद सुरक्षा कारणों से प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी गई।
राहत शिविर में लोग कर रहे सुरक्षित महसूस
स्थानीय लोगों ने भाजपा शासित मणिपुर के मोइरांग शहर में एक राहत शिविर स्थापित किया, जो पिछले कुछ दिनों में मैतई को एसटी में शामिल करने की मांग को लेकर हिंसा की चपेट में आ गया था। मोइरांग राहत शिविर में एक पीड़ित ने कहा, कुछ दस्तावेजों को छोड़कर हम अपना कोई सामान नहीं ला सके। बहुत तोड़-फोड़ और हिंसा हुई। राहत शिविर में सुरक्षित है और स्थानीय लोग हमारी मदद कर रहे हैं।
मन्त्रीपुखरी कैंप में महिला ने दिया बच्चे को जन्म
इंफाल के मन्त्रीपुखरी कैंप में 38 वर्षीय महिला एस्थर होंटाह ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। मणिपुर से असम राइफल्स द्वारा महिला को हिंसाग्रस्त क्षेत्र से निकाला और सुरक्षित कैंप पर पहुंचाया।