मणिपुर विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र दो सितंबर से शुरू होगा। सत्र की अवधि सीमित रखे जाने को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि राज्य लंबे समय से जातीय हिंसा के प्रभाव से जूझ रहा है और ऐसे समय में विधानसभा की केवल तीन बैठकें गंभीर मुद्दों पर चर्चा और सरकार की जवाबदेही तय करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
अधिकारियों के अनुसार, विधानसभा की पहली बैठक दो सितंबर को होगी। इसमें दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि, कार्य मंत्रणा समिति की रिपोर्ट पेश करने और सरकारी विधेयकों को पेश करने समेत अन्य कार्य होंगे। तीन सितंबर को प्रश्नकाल और अन्य विधायी कार्य होंगे। इसके बाद तीन दिन के अंतराल के बाद सात सितंबर को अंतिम बैठक होगी। इस दिन प्रश्नोत्तर के साथ सरकारी विधेयकों पर विचार और उन्हें पारित करने का काम किया जाएगा।
कांग्रेस विधायक दल के नेता कीशम मेघचंद्र ने सत्र की अवधि पर असहमति जताई है। उन्होंने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में शामिल होकर तीन दिन की अवधि के प्रस्ताव के खिलाफ असहमति पत्र सौंपा। मेघचंद्र ने कहा कि मणिपुर के सामने मौजूद गंभीर समस्याओं पर सार्थक चर्चा और सरकार की उचित विधायी निगरानी के लिए इतना छोटा सत्र पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि राज्य के लोगों को ऐसा विधानसभा सत्र चाहिए, जिसमें उनकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हो और महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस हो सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए केवल औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि प्रभावी ढंग से काम करने वाली विधानसभा जरूरी है। सत्र ऐसे समय हो रहा है, जब मणिपुर जातीय संघर्ष के लंबे दौर के बाद राहत, पुनर्वास, सुरक्षा और सामान्य स्थिति बहाल करने जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने के लिए विपक्ष विधानसभा में चर्चा की मांग कर सकता है।