मणिपुर प्रशासन ने उन आरोपों से इनकार किया कि हाल ही में उखरुल में शिरुई महोत्सव के दौरान राज्य सड़क परिवहन बस से राज्य का नाम जानबूझकर छुपाया गया था। प्रशासन ने कहा कि ऐसी कार्रवाई का न तो कोई निर्देश था और न ही दूर-दूर तक विचार था।
प्रशासन ने एक बयान में कहा कि उखरुल में शिरुई महोत्सव में राज्यभर से करीब 1.70 लाख लोग शामिल हुए। इसका श्रेय प्रशासन की अचूक सुरक्षा और कार्यक्रम के लिए सुनिश्चित किए गए शांतिपूर्ण माहौल को जाता है। हालांकि, 20 मई की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। बयान में कहा गया कि सरकारी बस के शीशे पर लिखे राज्य के नाम को छिपाने संबंधी आरोप गलत हैं। राज्य का नाम छिपाने के बारे में कोई निर्देश नहीं दिया गया था, यहां तक इस बारे में दूर-दूर तक विचार भी नहीं किया गया था। राज्य सरकार और जिम्मेदार राजनीतिक नेतृत्व ने इस बात को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। जमीनी स्तर पर क्या हुआ, यह पूरी जांच के बाद ही पता चलेगा।
राज्य प्रशासन ने इस अप्रिय घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया है तथा इस पर गहरा खेद जताया। मामले की जांच के लिए राज्यपाल ने आयुक्त (गृह) और सचिव (आईटी) की सदस्यता वाली एक जांच समिति गठित की है। इसे तय समय सीमा के अंदर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।
बयान में कहा गया कि हम सभी संबंधित पक्षों को आश्वस्त करना चाहते हैं कि एक बार रिपोर्ट पेश हो जाने और चूक के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो जाने पर, सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें कहा गया है कि राज्य यह भी सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी घटना न हो। कथित तौर पर बस पर लिखे राज्य के नाम को छिपाने के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मैतेई समूह इस घटना के लिए राज्यपाल से माफी मांगने तथा मुख्य सचिव, डीजीपी और सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।