मणिपुर में एक बार फिर से हिंसा भड़क उठी। ताजा हिंसा की घटनाओं को देखते हुए इंफाल पश्चिम जिले में पूर्ण कर्फ्यू लगा दिया गया है। दूसरी ओर, हिंसा में शामिल उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों के शस्त्रागार से कई अत्याधुनिक हथियार भी लूटे। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। हिंसा में 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं, जिनमें 10 गंभीर हैं।
मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में उपद्रवियों ने सुरक्षा बलों के 300 से ज्यादा हथियार और कई राउंड गोला-बारूद लूट लिया। मणिपुर के कांगपोकपी में जिले के कुछ हिस्सों से असम राइफल्स के जवानों की वापसी के विरोध में प्रदर्शन किया गया, जिसमें अधिकतर महिलाएं थीं। मणिपुर के कांगपोकपी जिलों में भी छिटपुट गोलीबारी की घटनाएं हुईं। मणिपुर में अधिकारियों ने जिले में कर्फ्यू में आंशिक ढील के आदेश वापस ले लिए है। अब यहां पर पूर्ण कर्फ्यू लगा रहेगा।
कुकी-जोमी के प्रस्तावित दफन स्थल पर यथास्थिति का आदेश
मणिपुर की जातीय हिंसा में मारे गए कुकी-जोमी लोगों को सामूहिक रूप से दफनाने की योजना से कुछ घंटे पहले हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को चुराचांदपुर में प्रस्तावित दफन स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। कुकी-जोमी संगठन ने बृहस्पतिवार को राज्य में जातीय दंगों में मारे गए 35 लोगों को चुराचांदपुर जिले के हाओलाई खोपी गांव में एक स्थल पर दफनाने की योजना बनाई थी, जिसके परिणामस्वरूप मणिपुर के कई जिलों में तनाव पैदा हो गया। कार्यवाहक चीफ जस्टिस एमवी मुरलीधरन व जस्टिस ए गुणेश्वर शर्मा की पीठ ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए सुबह छह बजे की सुनवाई शुरू की। राज्य और केंद्र सरकारों और उनकी कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ जनता को भी संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
सड़कों पर उतरी महिलाएं
बिष्णुपुर जिले में सुबह से ही तनाव व्याप्त है। यहां हजारों स्थानीय लोग सुरक्षाबलों की आवाजाही को रोकने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। महिलाओं के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने सेना और आरएएफ कर्मियों द्वारा लगाए गए बैरिकेड को पार करने की कोशिश की और मांग की कि उन्हें दफन स्थल तुइबुओंग तक जाने की अनुमति दी जाए।
कर्फ्यू में दी गई ढील ली वापस
दिन के दौरान, राज्य सरकार ने एहतियात के तौर पर इंफाल पूर्व और पश्चिम जिलों में कर्फ्यू में ढील वापस ले ली। इंफाल पूर्व और पश्चिम के जिला मजिस्ट्रेटों ने गड़बड़ी की आशंका के चलते दिन का कर्फ्यू फिर से लागू करने के अलग-अलग आदेश जारी किए।
यह है मामला
गौरतलब है, मणिपुर में अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में तीन मई को पर्वतीय जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के आयोजन के बाद झड़पें शुरू हुई थीं। राज्य में तब से अब तक कम से कम 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।