पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस के फैसले को शुक्रवार को अवसरवादी करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा की राजनीति तथा महात्मा गांधी की 1925 के उस कथन का अक्षम्य उल्लंघन है कि स्वराज का मतलब नैतिकता पर आधारित सरकार होना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कहा कि कांग्रेस ने टीवीके के विजय को अपने साथ जोड़कर अनैतिक कृत्य किया है और इसमें निम्न स्तर के राजनीतिक अवसरवाद की बू आती है।
मणिशंकर का आरोप, भाजपा के लिए पिछले दरवाजे खोल रहे हैं
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि अगर यह कदम द्रविड़ राजनीति के वर्चस्व वाले राज्य में सांप्रदायिक भाजपा के पिछले दरवाजे खोलती है तो यह सबसे खतरनाक और राजनीतिक फुटबॉल के इतिहास में सबसे खराब आत्मघाती गोल साबित होगा। अय्यर ने कहा कि वह इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि कांग्रेस के पूर्वज ऐसी अवसरवाद की राजनीति को अपना आशीर्वाद देते।
मणिशंकर ने कहा, राज्यव्यापी जनादेश पुरानी द्रविड़ पार्टियों के खिलाफ और सी जोसेफ विजय की टीवीके के पक्ष में आया और विजय पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं, एक पुराने और आज़माए हुए साथी को छोड़ने में निम्न स्तर की राजनीतिक अवसरवादिता की बू आती है। हालांकि अवसरवादिता चाणक्यवादी राजनीति का सार है। यह गांधी की कांग्रेस की सच्चाई की राजनीति नहीं थी।
जिससे हारे, उसी से गठबंधन
मणिशंकर ने कहा, द्रमुक के साथ चुनाव लड़ने के तुरंत बाद उस टीवीके के साथ गठजोड़ करने का फैसला बहुत खराब है, जिसने 23 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को हराया। अय्यर ने कहा, यह महात्मा गांधी के 1925 के उस कथन का अक्षम्य उल्लंघन है कि स्वराज को नैतिकता पर आधारित सरकार होनी चाहिए। एक लेख में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पूछा कि तमिलनाडु में कांग्रेस के साझेदार बदलने में चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की?
अय्यर ने कहा, कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं, उसने यह सीटें अपने दम पर नहीं बल्कि पूरी तरह से द्रमुक के साथ अपनी दशकों पुरानी कनिष्ठ साझेदारी के बल पर जीती। वास्तव में, पूर्व संसदीय क्षेत्र मयिलादुतुरई द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का इतना मजबूत गढ़ साबित हुआ, कि इसके छह विधानसभा क्षेत्रों में से पांच ने विजय की टीवीके के खिलाफ गठबंधन के सदस्यों के पक्ष में मतदान किया, जिसमें दो सीटें द्रमुक को और एक-एक सीट गठबंधन सहयोगियों डीएमडीके, आईयूएमएल और कांग्रेस को मिलीं।