पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर अपने बयानों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। एक बार फिर उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं पर निशाना साधा है और कहा, यदि इस पार्टी के लिए कर्ताधर्ता असहमति के स्वर का सामना नहीं कर सकते तो यह इसके लिए विनाशकारी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने मंगलवार को पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि इस पार्टी के लिए कर्ताधर्ता असहमति के स्वर का सामना नहीं कर सकते तो यह मुख्य विपक्षी दल के लिए ‘विनाशकारी है’ तथा पार्टी को शासन करने का कोई अधिकार नहीं है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस आलाकमान को यह चुनौती भी दी कि वह राहुल गांधी के मुंह से राजीव गांधी का 1989 में दिया वह बयान फिर से दिलवाएं कि 'सिर्फ धर्मिनिरपेक्ष भारत ही कायम रह सकता है।'
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पूर्व मंत्री मणिशंकर अय्यर ने यूट्यूब पर अपनी सीरीज मणि टॉक में जारी एक वीडियो में कहा, कांग्रेस असहमति के कारण जीवित है, अनेक मतों के कारण कांग्रेस का विकास होता है। यह सब वैदिक उपदेश से जुड़ा है कि ईश्वर एक है, कांग्रेस एक है। लेकिन ईश्वर तक पहुंचने के अनेक मार्ग हैं, और उसी प्रकार कांग्रेस तक पहुंचने के भी अनेक मार्ग हैं। दुर्भाग्य से, ऐसा लगता है कि वर्तमान पार्टी इस सबक को भूल गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, जो लोग ईमानदारी से असहमति व्यक्त करते हैं, वे राजनीतिक दायरे में ही रहते हैं। जो लोग बेईमानी से असहमति जताते हैं, इतिहास स्वयं, शायद ईश्वर खुद, उन्हें दंडित करता है। इसलिए, यदि वर्तमान व्यवस्था किसी असंतुष्ट को बर्दाश्त नहीं कर सकती, तो मुझे डर है कि यह कांग्रेस का अंत है।
राजीव व इंदिरा का दौर किया याद
अय्यर ने याद दिलाया कि 5 मई, 1989 को राजीव गांधी ने संसद में कहा था कि सिर्फ धर्मनिरपेक्ष भारत ही टिक सकता है। और अगर भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है तो शायद यह अस्तित्व के लायक भी नहीं है। अय्यर ने कहा, मैं कांग्रेस के हाई कमान से, जिन्होंने मुझे कार्यकारी समिति से बाहर रखा है, पूछता हूं: क्या आपमें राजीव गांधी के पुत्र के मुंह से निकले शब्दों को दोहराने का साहस है। अय्यर ने जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के समय में कांग्रेस में असंतुष्टों के आवाज उठाने के कई उदाहरण दिए।