केरल हाईकोर्ट में कप्पन की सदस्यता रद्द करने की मांग
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केरल में पाला विधानसभा सीट से विधायक मणि सी कप्पन की सदस्यता पर अब कानूनी संकट खड़ा हो गया है। उनके खिलाफ केरल हाईकोर्ट में शुक्रवार को याचिका दायर की गई है। याचिका में मुंबई की अदालत से चार चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने और कुल साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाए जाने का हवाला देते हुए उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है। यह याचिका दिनेश मेनन ने दायर की है, जिन्होंने कप्पन के खिलाफ चारों चेक बाउंस मामले शुरू किए थे। याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई के लिए विचार किया जाएगा।
मणि सी कप्पन को किस मामले में सजा हुई है?
- याचिका के मुताबिक, मुंबई के बोरीवली स्थित अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने 1 सितंबर को कप्पन को चारों चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें कुल साढ़े तीन साल की जेल की सजा सुनाई है। याचिका में कहा गया है कि चारों सजाएं लगातार चलनी हैं।
- ये मामले 19 नवंबर 2013 को हुए एक समझौते और उसके बाद जारी किए गए चेक से जुड़े हैं। इन चार चेक की रकम 75 लाख रुपये, एक करोड़ रुपये, एक करोड़ रुपये और 50 लाख रुपये थी। यानी चारों मामलों में कुल रकम 3.25 करोड़ रुपये थी।
याचिकाकर्ता ने विधानसभा अध्यक्ष से क्या मांग की?
दिनेश मेनन ने 8 सितंबर को केरल विधानसभा अध्यक्ष के सामने कप्पन की सदस्यता खत्म करने की मांग रखी थी। याचिका के अनुसार, इस मांग से जुड़ा मूल आवेदन और प्रमाणित प्रतियां 9 सितंबर को विधानसभा अध्यक्ष के निजी सचिव को सौंप दी गईं। याचिकाकर्ता का कहना है कि निजी सचिव ने उन्हें बताया कि विधानसभा अध्यक्ष 28 सितंबर को तिरुवनंतपुरम लौटेंगे। इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया और कहा कि विधानसभा अध्यक्ष संवैधानिक पद पर हैं, इसलिए उन्हें इस मामले पर तत्काल विचार करके जरूरी कार्रवाई करनी चाहिए।
कप्पन की सजा और विधायक पद के बीच क्या कानूनी सवाल है?
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के सामने यह तर्क रखा है कि अयोग्यता तय करते समय लगातार चलने वाली सभी सजाओं की कुल अवधि को देखा जाना चाहिए। इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट की ओर से इसी तरह के मामलों में की गई टिप्पणियों का हवाला दिया गया है। याचिका में अदालत से मांग की गई है कि कप्पन को 1 सितंबर से पाला के विधायक पद पर बने रहने के लिए अयोग्य घोषित किया जाए। साथ ही उनकी विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करने और चुनाव आयोग को उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
क्या कप्पन को विधायक की सुविधाएं भी रोकने की मांग हुई है?
- याचिका में केवल सदस्यता खत्म करने की मांग नहीं की गई है। याचिकाकर्ता ने अंतरिम आदेश की भी मांग की है। इसके तहत मामले का अंतिम फैसला आने तक राज्य सरकार और विधानसभा अध्यक्ष को कप्पन को विधायक के तौर पर मिलने वाले वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधाओं का भुगतान करने से रोकने की मांग की गई है।
- मामले में केरल सरकार, भारत निर्वाचन आयोग, केरल विधानसभा अध्यक्ष और मणि सी कप्पन को पक्षकार बनाया गया है। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि याचिका पर अदालत किस तरह आगे बढ़ती है।
पाला से कैसे विधायक बने थे मणि सी कप्पन?
मणि सी कप्पन ने पाला विधानसभा सीट से चुनाव एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीता था और उन्हें यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ का समर्थन प्राप्त था। अब मुंबई की अदालत से मिली सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता चाहता है कि 1 सितंबर से ही कप्पन को विधायक पद के लिए अयोग्य माना जाए, सीट खाली घोषित की जाए और उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो। फिलहाल यह मामला केरल हाईकोर्ट में पहुंच चुका है और याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई के लिए विचार होना है।