भाजपा नेता मेनका गांधी ने रविवार (04 जनवरी) को कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों ने देश को 'नुकसान' पहुंचाया है, क्योंकि सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने देश को 'बांट' दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में राज्यों को 'कुत्ते के काटने की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी' को देखते हुए अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, खेल परिसरों, बस टर्मिनलों और रेलवे स्टेशनों के परिसर से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया था।
मेनका बोलीं- 'पूरे देश में नफरत का माहौल बना दिया'
मीडिया से बात करते हुए मेनका गांधी ने कहा, 'सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे भारत में नफरत का माहौल बना दिया है... न्यायाधीशों ने जो किया है वह गलत है, उन्होंने भारत को दो हिस्सों में बांट दिया है: एक हिस्सा नफरत करता है तो दूसरा प्यार करता है। इसके जरिए उन्होंने भारत को नुकसान पहुंचाया है। पशु कल्याण अधिनियम एक बहुत अच्छा अधिनियम है। उन्होंने अधिनियम को हटाया नहीं है। उन्होंने केवल इतना कहा है कि आप अधिनियम के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। यह सही नहीं है।'
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में आवारा कुत्तों के खतरे का स्वतः संज्ञान लिया था। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 22 अगस्त को दो न्यायाधीशों की पीठ के 11 अगस्त के आदेश में संशोधन किया था, जिसमें दिल्ली-एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें आश्रय स्थलों से छोड़ने पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था।
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जानिए क्या थे SC के आदेश
22 अगस्त के आदेश में कहा गया कि रेबीज से संक्रमित या आक्रामक व्यवहार प्रदर्शित करने वाले कुत्तों को छोड़कर, सभी आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ दिया जाएगा। इसमें आवारा कुत्तों को सार्वजनिक रूप से खाना खिलाने पर भी रोक लगाई गई थी और नगर निगम विभाग को प्रत्येक वार्ड में कुत्तों के लिए विशेष भोजन स्थल बनाने का निर्देश दिया गया था। इसमें यह भी आदेश दिया गया था कि इस निर्देश का उल्लंघन करते हुए कुत्तों को खाना खिलाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।
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