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राजधानी में निकली इंसानियत की शव यात्रा, पत्नी की लाश लेकर पांच घंटे भटका

Wed, 14 Sep 2016 05:36 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पत्नी का शव कंधे पर लेकर 12 किलोमीटर तक चलने वाले ओडिशा के दाना मांझी को लोग अभी भूल भी नहीं पाए हैं कि देश की राजधानी में सोमवार रात इसी तरह की एक और शर्मसार करने वाली घटना घटित हुई। चाय की दुकान चलाने वाले छोटेलाल पत्नी का शव सुरक्षित रखने के लिए पांच घंटों तक इधर से उधर भटकते रहे।
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मकान मालिक ने घर में शव रखने नहीं दिया और अस्पताल के गार्ड ने उन्हें अंदर नहीं आने दिया। थक-हार कर वह सड़क पर एंबुलेंस खड़ी कर सुबह होने का इंतजार करने लगे। बाद में पुलिस की मदद से शव सुरक्षित रखवाया जा सका।

कड़कड़डूमा निवासी छोटेलाल चाय की दुकान चलाते हैं। सोमवार रात वह बीमार पत्नी अंजू को लेकर हेडगेवार अस्पताल पहुंचा। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद चिकित्सकों ने कागजी खानापूर्ति के बाद शव छोटेलाल को सौंप दिया।
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छोटेलाल का कहना है कि जब वह एंबुलेंस से शव लेकर घर पहुंचे तो मकान मालिक देवेंद्र ने इसे घर में रखने से रोक दिया। इसके बाद शव दोबारा एंबुलेंस में रखकर वह अस्पताल गए। लेकिन वहां गार्ड ने अंदर जाने से रोक दिया।
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मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार किया गया

काफी समय तक वह शव लेकर सड़क किनारे खड़े रहे और सुबह होने की प्रतीक्षा करने लगे। इस दौरान गश्त कर रहे पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ी। पुलिस वाले ने उनसे पूछताछ की तो सारा मामला पता चला। इसके बाद गांव प्रधान भंवर सिंह की मदद से शव सुरक्षित रखवाया गया और मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार किया गया।

उधर, छोटेलाल के मकान मालिक देवेंद्र का कहना है कि छोटेलाल की पत्नी की मौत बीमारी से हुई थी। इसकी कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि उनके पास इससे संबंधित कोई कागज भी नहीं थे। इस संबंध में अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक से बात नहीं हो सकी।
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