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कोलकाता के शख्स ने ऑनलाइन मंगाया कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो, लेकिन घर पहुंची भगवदगीता

Mon, 15 Jun 2020 05:06 PM IST
Rohit Ojha न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
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भगवद गीता - फोटो : सोशल मीडिया
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आजकल हर कोई घर बैठे अपनी जरूरत की चीजें ऑनलाइन मंगा रहा है, लेकिन इस दौरान कई बार आपके मंगाए सामान की जगह दूसरी चीजें आप तक पहुंच जाती हैं। कई बार ई-कॉमर्स कंपनियों की गलती के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार तो ऐसे हालात बनते हैं कि हंसी छूट जाती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां ऑर्डर करने वाला शख्स खुद भी हैरान है। 

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दरअसल, कोलकाता के रहने वाले सुतीर्थो दास ने एक ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल से कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो ऑर्डर किया था, लेकिन जब डिलिवरी के बाद उन्होंने पैकेट खोल कर देखा तो उसमें से भगवदगीता निकली। सुतीर्थो दास ने बताया कि उन्होंने एक ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल से कम्युनिस्ट घोषणापत्र ऑर्डर किया था, लेकिन दास के निवास स्थान पर जो पहुंचा उससे दास भी हैरान थे। किताब और चुकाई गई राशि की फोटो जारी करते हुए फेसबुक पर सुतीर्थो दास ने लिखा कि वह डिलिवरी पैकेट खोलने के बाद आश्चर्य में पड़ गए थे, क्योंकि दोनों किताबें एक दूसरे से हर स्तर पर बिल्कुल जुदा है।

दास ने कहा कि उन्होंने 10 जून को ई-कॉमर्स कंपनी के पोर्टल से ‘कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो’ ऑर्डर किया था क्योंकि इस पर छूट मिल रहा था। 13 जून को उनके घर में किताब का पैकेट आया। वह उस समय अपने कार्यालय में थे। उन्होंने कहा, ‘घर पहुंचने पर मैंने पैकेट खोला तो चौंक गया, मैंने पाया कि मुझे जो किताब दी गई है, वह कम्युनिस्ट मैनिफोस्टो नहीं बल्कि भगवदगीता  है।’
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उन्होंने बताया कि 120 पन्नों वाली यह किताब अंग्रेजी भाषा में है और यह भगवदगीता का संक्षित रूप है। व्यक्ति के पोस्ट पर कई मजाकिया टिप्पणियां आईं और कई लोगों ने आलोचना भी की। वहीं कई लोगों ने इस पोस्ट को शेयर भी किया। स्पष्टीकरण के लिए ई-रिटेल कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन का जवाब नहीं दिया।

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