बेंगलुरु एक फास्ट-ट्रैक अदालत ने एक व्यक्ति को 2015 में एक साल के बच्चे के साथ कुकर्म करने और उसकी हत्या करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। न्यायाधीश केएन रूपा ने आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत अपराध के लिए मौत की सजा सुनाई और आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक यौन कृत्य) के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई और दोषी पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
दोषी को पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा भी सुनाई गई है। बेंगलुरु सिटी डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी को मासूम बच्चे के शोक संतप्त परिवार को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है। ट्रायल कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पॉक्सो एक्ट को लागू हुए 10 साल हो चुके हैं। हालांकि, इस तरह के आपराधिक कृत्य कम नहीं हुए हैं बल्कि दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहे हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और पीड़िता के पिता एक-दूसरे को जानते थे। 12 सितंबर 2015 को दोपहर 2 बजे बच्चे के पिता ने आरोपी को अपने बेटे की देखभाल का जिम्मा सौंपा क्योंकि उसे कुछ जरूरी काम था। बाद में आरोपी बच्चे को यशवंतपुर के पास सुनसान इलाके में ले गया और अपराध को अंजाम दिया। जब बच्चे के रोने की आवाज लोगों ने सुनी तो आरोपी डर गया और बच्चे को पीट-पीट कर मार डाला।