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कोर्ट का आदेश, संबंध बनाने में असमर्थ पत्नी की जांच की मांग कर सकता है पति

Sat, 10 Sep 2016 11:30 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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डेमो फोटो
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कहा गया था कि पति संबंध बनाने में असमर्थ पत्नी की जांच की मांग कर सकता है। पति द्वारा 2011 में दायर की गई तलाक याचिका में मुंबई फैमिली कोर्ट ने जुलाई में दिए अपने फैसले में महिला से कहा था कि मुंबई के सर जेजे अस्पताल में आपको शारीरिक और मनोवैज्ञानिक जांच करवानी होगी।
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इस फैसले को महिला ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। जस्टिस के के टातेड ने महिला द्वारा मुंबई फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में दी गई चुनौती को खारिज कर दिया है और फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

बताते चलें कि पांच साल पहले फैमिली कोर्ट में दायर की गई याचिका में पति ने अपनी पत्नी पर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी संबंध नहीं बना सकती। पति ने तलाक याचिका में आधार पत्नी का शारीरिक संबंध बनाने में असमर्थ होना बताया था।पति का दावा है कि शादी के बाद से उसकी पत्नी ने कभी संबंध नहीं बनाए।
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दोनों की यह दूसरी शादी थी

डेमो फोटो
दोनों ने दिसंबर 2010 में शादी की थी और उस समय महिला की उम्र 33 और पुरुष की 38 साल थी। दोनों की यह दूसरी शादी थी। फैमिली कोर्ट ने मेडिकल जांच सर जेजे अस्पताल के मेडिकल बोर्ड द्वारा कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड को महिला के कथित तौर पर नपुंसक होने या ना होने की जांच करने के लिए कहा था।

मेडिकल जांच कराने के फैसले से असंतुष्ट पत्नी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट गई थी। महिला के वकील मंदर लिमाये ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा कि पति की मांग अनुचित है और काफी समय बाद की गई है। वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा बिना दूसरे पक्षे के विशिष्ट आधार के फैमिली कोर्ट इस तरह का जांच का आदेश नहीं दे सकता।
 
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महिला ने कहा था, वह किसी भी जांच के लिए है तैयार

सजा सुनने के बाद भाग - फोटो : amar ujala
हाईकोर्ट ने पति के वकील रमेश लावानी के उस निवेदन को स्वीरकार कर लिया जिसमें कहा गया कि याचिका में अभी देर नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने माना है कि मेडिकल जांच की जरूरत है। कोर्ट ने कहा महिला ने फैमिली कोर्ट के सामने कहा था कि वह किसी भी तरह की जांच कराने के लिए तैयार है।

रमेश लावानी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ही हवाला देते हुए कोर्ट में कहा कि फैमिली कोर्ट के पास मेडिकल जांच कराने का आदेश देने का अधिकार है और इस तरह का फैसला जीवन के अधिकार के तहत दी गई व्यक्तिगत स्वतंत्रता का भी उल्लंघन नहीं है। पत्नी द्वारा फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की गई याचिका में हाईकोर्ट को कोई दम नजर नहीं आया।
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