पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
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ममता बनर्जी सरकार की तरफ से अनारक्षित श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सरकारी नौकरियों एवं शिक्षण संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा करने से पश्चिम बंगाल उच्चतम न्यायालय द्वारा तय 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा को पार करने वाला चौथा राज्य बन गया है।
मंगलवार को की गई यह घोषणा केंद्र की भाजपा नीत सरकार द्वारा छह माह पहले स्वीकृत इसी तरह के प्रस्ताव के बाद आई है। बंगाल ने अब तक सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में 45 प्रतिशत आरक्षण दिया है। अनुसूचित जाति के लिए 22 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के लिए छह प्रतिशत और अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 17 प्रतिशत आरक्षण दिया है।
सियासी मजबूरी में फैसला
कहा जा रहा है कि प्रदेश में तृणमूल के घटते जनाधार और भाजपा के बढ़ते कद से परेशान ममता बनर्जी का यह फैसला पार्टी को राज्य में नई ताकत देगा।
हालांकि ममता बनर्जी सरकार ने गरीबों के आरक्षण को पहले लागू न करने की बात कही थी। केंद्र में भाजपा नीत एनडीए सरकार द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी देने के छह महीने बाद ममता सरकार ने इसे लागू किया है।
संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा, ‘‘यह एक ऐतिहासिक फैसला है । आर्थिक रूप से कमजोर तबके से जुड़े होने को परिभाषित करने के लिए कई कारक हैं। जल्द जारी होने वाले सरकारी आदेश में इन विवरणों का उल्लेख किया जाएगा। ’’
कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि इसके बारे में योग्यता की घोषणा बाद में की जाएगी लेकिन अन्य आरक्षण के दायरे में आने वाले इस आरक्षण के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।