यास त्रासदी की समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंतजार कराने के आरोपों पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, जब हम जब पहुंचे तो एसपीजी ने हमें बाहर रोक दिया। मैंने सभागार में खाली कुर्सियां भी देखीं। ममता ने साथ ही पूछा कि बैठक पीएम और सीएम के बीच होनी थी तो उसमें विपक्ष के नेता (शुभेंदु) को क्यों शामिल किया गया? इससे पहले गुजरात और ओडिशा में भी तूफान को लेकर हुई समीक्षा बैठक में तो विपक्ष के नेता को नहीं शामिल किया गया था।
ममता की 20 हजार करोड़ की मांग अवास्तविक: दिलीप घोष
पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने शनिवार को ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनके द्वारा केंद्र से तूफान राहत कार्य के लिए 20 हजार करोड़ रुपये की मांग को अवास्तविक बताया। उन्होंने कहा, ममता समीक्षा बैठक में भी इस लिए नहीं पहुंची क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनसे नुकसान के दावे की विस्तृत जानकारी न मांग ली जाए। शुभेंदु के कारण बैठक में नहीं आने के ममता के तर्क पर घोष ने कहा, शुभेंदु तो विधानसभा के सत्र में भी हिस्सा लेंगे। तो क्या ममता सत्र में जाना छोड़ देंगी।
ममता पर पलटवार करते हुए नंदीग्राम से भाजपा विधायक शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ममता शायद यह स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि उन्हें हराकर मैं नेता विपक्ष बना हूं। विधानसभा चुनाव हारने के बाद सीएम बनी ममता को जनता द्वारा निर्वाचित विधायक का अपमान करने का हक नहीं है।
ममता ने पीएम मोदी का भी अपमान किया है और यह पहली बार नहीं है, इससे पहले भी कोरोना और राष्ट्रीय गंगा परिषद की बैठक में नहीं पहुंचकर भी वह ऐसा कर चुकी हैं। ममता को स्वीकार करना होगा कि अगर उनकी पार्टी को 2.87 करोड़ लोगों ने वोट किया है तो भाजपा को भी 2.27 करोड़ जनता ने अपना समर्थन दिया है।