पंचायत चुनावों में निर्विरोध सीटों पर चुनाव रद्द करने की माकपा एवं भाजपा की याचिकाओं को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सीएम ममता बनर्जी ने राहत की सांस ली है। तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताते हुए विपक्षी राजनीतिक दलों से राज्य के लोगों से माफी मांगने के लिए कहा है। दूसरी ओर, भाजपा ने फैसले को स्वीकार करते हुए कहा है कि वह अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से तृणमूल कांग्रेस का मुकाबला करेगी जबकि माकपा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैरानी जताई है।
तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह लोकतंत्र की जीत है। यह विपक्षी दलों के लिए सबक है। इससे साबित हो गया है कि उनके आरोप निराधार थे। इसके लिए उन्हें राज्य के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। मुखर्जी ने कहा कि अब निर्विरोध रूप से जीते उम्मीदवारों की प्रशिक्षण प्रक्रिया एक हफ्ते के भीतर शुरू हो जाएगी।
वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने यहां पत्रकारों से कहा कि हमें शीर्ष अदालत का फैसला मंजूर है। हम अगले लोकसभा चुनावों में लोकतांत्रिक तरीके से तृणमूल का मुकाबला करेंगे। जबकि माकपा के प्रदेश सचिवालय के वरिष्ठ सदस्य रबीन देब ने कहा कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों और इस फैसले में कोई समानता नहीं है। क्या कोई इस तथ्य से इंकार कर सकता है कि पंचायत इलाकों के 34 फीसदी वोटरों को मताधिकार से वंचित कर दिया गया? यह फैसला आश्चर्यजनक है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि तमाम सीटों पर हिंसा व आतंक के बीच पंचायत चुनाव हुए थे। इस दौरान राज्य में लोकतंत्र की हत्या कर दी गई थी। बता दें कि पिछले मई में हुए पंचायत चुनावों में 20 हजार से ज्यादा सीटों पर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। माकपा एवं भाकपा ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर उक्त सीटों पर चुनाव रद्द करने की मांग की थी।