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SIR Row: जलपाईगुड़ी में बीएलओ की मौत पर भड़कीं सीएम ममता, कहा- एसआईआर से लोगों पर डाला जा रहा 'असहनीय दबाव'

Wed, 19 Nov 2025 02:34 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

चुनाव आयोग की तरफ से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से इसमें शामिल बीएलओ की मौत से जुड़ी घटनाएं सामने आ रही है। वहीं जलपाईगुड़ी में एक बीएलओ की मौत के मामले में सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है।
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चुनाव आयोग पर बरसीं सीएम ममता बनर्जी - फोटो : ANI
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को जलपाईगुड़ी के माल ब्लॉक में एक बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत पर दुख व्यक्त किया और आरोप लगाया कि मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं पर अमानवीय दबाव डाला है और अब तक 28 मौतें हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि मृतका, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जो बीएलओ के रूप में कार्यरत थी, ने भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) की तरफ से किए जा रहे पुनरीक्षण कार्य के असहनीय दबाव के कारण आत्महत्या कर ली।
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'एसआईआर के असहनीय दबाव में अपनी जान ले ली'
एक्स पर पोस्ट किए गए एक कड़े शब्दों वाले बयान में, सीएम ममता बनर्जी ने 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले चुनाव आयोग की आलोचना करते हुए उसे 'अनियोजित, अथक कार्यभार' बताया। उन्होंने एक्स पर अपने पोस्ट में लिखा- 'गहरा सदमा और दुख हुआ। आज फिर, हमने जलपाईगुड़ी के माल में एक बूथ लेवल अधिकारी को खो दिया, एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता जिसने चल रहे एसआईआर कार्य के असहनीय दबाव में अपनी जान ले ली।'
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'SIR शुरू होने के बाद से अब तक 28 मौतें'
उन्होंने कहा कि एसआईआर शुरू होने के बाद से अब तक 28 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, कुछ डर और अनिश्चितता के कारण, तो कुछ तनाव और कार्यभार के कारण। उन्होंने कहा, 'तथाकथित चुनाव आयोग की तरफ से लगाए गए अनियोजित और अथक कार्यभार के कारण इतनी कीमती जानें जा रही हैं। एक प्रक्रिया जो पहले तीन साल में पूरी होती थी, अब राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए चुनाव से ठीक पहले दो महीनों में पूरी की जा रही है, जिससे बीएलओ पर अमानवीय दबाव पड़ रहा है।'

'चुनाव आयोग विवेक से काम ले और SIR तुरंत रोकें'
सीएम ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से विवेक से काम लेने और अभियान को तुरंत स्थगित करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि अगर एसआईआर कार्य की वर्तमान गति जारी रही तो और भी जानें जा सकती हैं। उन्होंने कहा, 'मैं चुनाव आयोग से आग्रह करती हूं कि वह विवेक से काम ले और और जानें जाने से पहले इस अनियोजित अभियान को तुरंत रोक दे।'
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SIR को लेकर टीएमसी-भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप
बता दें कि टीएमसी नेताओं ने बार-बार चुनाव आयोग पर समय सीमा आगे बढ़ाने और चुनावों से पहले बीएलओ पर अत्यधिक क्षेत्रीय सत्यापन कार्य का बोझ डालने का आरोप लगाया है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि लंबे काम के घंटे, यात्रा संबंधी जरूरतों और समय सीमा पूरी करने के दबाव के कारण कई कर्मचारी बेहाल हो गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, विपक्षी दलों ने टीएमसी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सरकार क्षेत्रीय स्तर के कर्मचारियों को कम प्रशासनिक सहायता देने की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है।
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