पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
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बंगाल में जारी एसआईआर का ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी द्वारा विरोध किया जा रहा है। हालांकि विरोध के बावजूद एसआईआर की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। ऐसे में अब ममता बनर्जी ने एसआईआर की धार को कुंद करने के लिए जनमत जुटाने का फैसला किया है। इसी के तहत ममता बनर्जी चुनावी मोड में लगातार रैलियां करने जा रही हैं। इस हफ्ते ममता बनर्जी मालदा और मुर्शिदाबाद में विशाल रैलियां करेंगी और फिर अगले हफ्ते कूच बिहार में एक बड़ी रैली को संबोधित कर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश करेंगी।
एसआईआर के मुद्दे पर भाजपा को घेरने की तैयारी
गौरतलब है कि इससे पहले ममता बनर्जी ने बीते हफ्ते बोनगांव में एसआईआर के खिलाफ रैली की थी। यह रैली मतुआ समुदाय के प्रभाव वाले इलाके में की गई, जो एसआईआर को लेकर डरे हुए हैं। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल परिवारों को डराने के लिए किया जा रहा है। टीएमसी ने जिला स्तर पर भी एसआईआर के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। टीएमसी नेताओं ने बताया कि ममता बनर्जी 3 और 4 दिसंबर को मालदा और मुर्शिदाबाद में रैलियों को संबोधित करेंगी। वहीं 9 दिसंबर को कूच बिहार में रैली करेंगी।
ये तीनों ही जिले सीमावर्ती है और यहां पर बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय, प्रवासी और विस्थापित लोग रहते हैं। इन समुदायों में एसआईआर को लेकर ज्यादा आशंकाएं हैं। यही वजह है कि टीएमसी लोगों के इस डर और आशंका को भुनाने और 2026 के विधानसभा चुनाव में फायदा लेने की कोशिश कर रही है। इन रैलियों को टीएमसी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है।
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संगठन के स्तर पर भी सक्रिय हुई टीएमसी
मालदा की रैली गजोले में और मुर्शिदाबाद की बेहरामपुर स्टेडियम में होनी है। वहीं 9 दिसंबर को ऐतिहासिक रास मेला मैदान में होने वाली कूच बिहार रैली को ममता बनर्जी की सबसे बड़ी लामबंदी के तौर पर पेश किया जा रहा है। तैयारियों की घोषणा करते हुए, जिला टीएमसी अध्यक्ष अभिजीत डे भौमिक ने बताया कि 1 दिसंबर को ब्लॉक अध्यक्षों के साथ एक आपात बैठक होगी, जिसके बाद 2 दिसंबर को रवींद्र भवन में जिला स्तर पर तैयारी का सत्र आयोजित होगा, जिसमें मंत्री, पार्टी सांसद और विधायकों के साथ ही पार्षद और पंचायत अधिकारी मुख्यमंत्री की रैली की योजना पर चर्चा की जाएगी।