पश्चिम बंगाल में ग्रामीण इलाके ही हमेशा सत्ता की चाबी रहे हैं। वाम मोर्चा सरकार अगर 34 वर्षों तक सत्ता में बनी रही तो उसके पीछे ग्रामीण वोटरों की अहम भूमिका थी। अबकी भी अपवाद नहीं है। राज्य में वाममोर्चा सरकार अगर 34 साल तक लगातार सत्ता में रही थी तो इसकी सबसे बड़ी वजह ग्रामीण इलाकों में उसका मजबूत जनाधार होना था। वैसे, इस बार ममता बनर्जी को शहरी क्षेत्रों के वोटरों का भी समर्थन मिला है।
राज्य के ग्रामीण इलाकों में लोगों को शारदा चिटफंड घोटाले और तृणमूल कांग्रेस नेताओं पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों और कोलकाता में हुए फ्लाईओवर हादसे से कोई मतलब नहीं है। उनके लिए ममता बनर्जी सरकार की ओर से शुरू की गई सबूज साथी, खाद्य साथी और कन्याश्री व युवाश्री जैसी योजनाएं ही समर्थन का पैमाना हैं। उन्होंने चुनाव अभियान के दौरान ग्रामीण इलाकों पर खास ध्यान दिया और तमाम योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार करती रही हैं।
ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखते हुए ही ममता ने अपने कार्यकाल के आखिरी दो वर्षों के दौरान तमाम ऐसी योजनाएं शुरू की जो वोटरों पर पकड़ मजबूत बना सके।