ममता बनर्जी की 2021 की पैर की चोट को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। शुभेंदु अधिकारी ने बांगुर इंस्टीट्यूट की 11 मार्च 2021 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उसमें पैर में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था। इसके बाद ममता के वकील ने मेडिकल रिकॉर्ड सार्वजनिक होने पर एसएसकेएम और बांगुर इंस्टीट्यूट को नोटिस भेजा। आखिर रिपोर्ट सार्वजनिक कैसे हुई और उसमें क्या लिखा था?
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 2021 की पैर की चोट को लेकर पांच साल बाद फिर विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि ममता की चोट को लेकर सामने आई 11 मार्च 2021 की मेडिकल रिपोर्ट में पैर में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था। इसके बाद ममता बनर्जी के वकील अर्क नाग ने मेडिकल रिकॉर्ड कथित तौर पर बिना अनुमति सार्वजनिक किए जाने को लेकर एसएसकेएम अस्पताल और बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज को कानूनी नोटिस भेजा है। इस पूरे मामले में अब मेडिकल रिपोर्ट की सामग्री के साथ उसे सार्वजनिक किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता की चोट को लेकर क्या दावा किया था?
शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने पैर की चोट को लेकर गलत दावा किया था। कुछ दिन पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक दस्तावेज दिखाया था। उनका कहना था कि यह 11 मार्च 2021 की बांगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज के रेडियो डायग्नोसिस विभाग की रिपोर्ट है। अधिकारी के अनुसार, रिपोर्ट में पैर में फ्रैक्चर का कोई सबूत नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि राज्य सरकार 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ममता की पैर की चोट को लेकर किए गए दावों की नई जांच शुरू करेगी।