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West Bengal Election 2026: ममता बनर्जी इन चार दिशाओं में दुरुस्त, भाजपा के लिए इन्हें भेदना बड़ी चुनौती

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सीएम ममता बनर्जी। - फोटो : पीटीआई
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पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस चार विशेष समीकरणों को साधकर एक बार फिर चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। इनमें अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकतम मतदाताओं को अपने साथ बनाए रखना, बहुसंख्यक हिंदू समुदाय के एक हिस्से पर पकड़ बनाकर भाजपा से बढ़त हासिल करना, महिला मतदाताओं को विशेष लाभ देकर अपने पाले में रखना और भ्रष्टाचार के आरोपों को कमजोर करने के लिए चुनाव में नए चेहरे उतारना शामिल है। इन चारों मोर्चों पर ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर दिए बिना भाजपा के लिए बंगाल की राह आसान होने वाली नहीं है। 

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पश्चिम बंगाल में करीब 30 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं। माना जाता है कि राज्य में वाम दलों और कांग्रेस के कमजोर होने के बाद भाजपा के खिलाफ रणनीतिक वोटिंग करने के लिए वे बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस की ओर शिफ्ट कर गए हैं। प. बंगाल की कुल 294 सीटों में से करीब 50 सीटों पर मुस्लिम मतदाता अकेले निर्णायक भूमिका निभाते हैं। आज की परिस्थितियों में इन सीटों पर ममता बनर्जी को हराना टेढ़ी खीर माना जाता है।  

नए समीकरणों में कभी ममता बनर्जी के करीबी रहे हुमायूं कबीर 'आम जनता उन्नयन पार्टी' बनाकर टीएमसी के इसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने राज्य की 182 मुस्लिम बहुल सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। लेकिन ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी चुनावी क्षमता को लेकर संदेह व्यक्त किए जा रहे हैं। वे ममता बनर्जी का कितना नुकसान कर पाएंगे, कहा नहीं जा सकता। मोटे तौर पर अभी ममता बनर्जी का मुस्लिम समीकरण पूरी तरह उनके कब्जे में बताया जा रहा है। 
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हिंदुओं को भी साधने की कोशिश
पश्चिम बंगाल में भाजपा लगातार अवैध घुसपैठ, हिंदुओं की सुरक्षा और मूल बंगालियों की रोटी-बेटी पर खतरे का मुद्दा उठा रही है। टीएमसी का आरोप यही रहा है कि भाजपा इन समीकरणों के सहारे राज्य में सांप्रदायिक विभाजन कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश करती है। भाजपा के इस दांव को ध्वस्त करने के लिए ममता बनर्जी स्वयं अपने को हिंदू हितैषी साबित करने से नहीं चूक रही हैं। 

ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दीघा जगन्नाथ मंदिर और एक शिव मंदिर के निर्माण में अप्रत्यक्ष तरीके से सहयोग देकर हिंदू जनता को यही संदेश देने की कोशिश किया है कि वे किसी एक वर्ग के साथ नहीं हैं, बल्कि वे हर वर्ग को साथ लेकर चल रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तिथियों की घोषणा से ठीक पहले मुस्लिम धर्मगुरुओं और हिंदू पुजारियों के वेतन में एक साथ बढ़ोतरी कर भी उन्होंने हिंदू समुदाय को यही संदेश देने की कोशिश किया है। 

चुनाव विश्लेषक मानते हैं कि 30 फीसदी मुसलमानों के बड़े हिस्से के साथ हिंदू जनता का एक हिस्सा भी साथ आ जाता है तो ममता बनर्जी को हराना मुश्किल हो जाता है। इसी समीकरण के बल पर ममता बनर्जी आज की परिस्थितियों में बंगाल में अजेय दिख रही हैं। ममता के इस समीकरण से निपट पाना भाजपा सहित किसी भी दल के लिए आसान नहीं होगा।  

महिलाओं को लुभाने की कोशिश
ममता बनर्जी की एक बड़ी ताकत उनकी ऐसी महिला मतदाता हैं जो उनके महिला हितैषी कार्यों के लिए उन्हें वोट करती हैं। ऐसी महिलाएं हर समाज, हर वर्ग से हैं। चुनाव के अंतिम दिनों में महिला कर्मचारियों के लिए विशेष घोषणाएं और आर्थिक लाभ देकर ममता बनर्जी ने इसी वोट बैंक को मजबूत करने का काम किया है। भाजपा इस वर्ग को लुभाने के लिए बड़े वादे कर सकती है, लेकिन जमीन पर लाभ दे रही ममता पर से उनका भरोसा डिगा पाना आसान नहीं है। 

भ्रष्टाचार के आरोपों को इस तरह कर कमजोर कर रहीं ममता
भाजपा टीएमसी सरकार में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाती है। वह टीएमसी कार्यकर्ताओं पर कट मनी लेने का भी आरोप लगाती है। भ्रष्टाचार के ये आरोप तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तीन बार सत्ता में रहने के कारण तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ एक एंटी इनकमबेंसी फैक्टर भी तैयार हो गया है। लेकिन ममता बनर्जी ने इस चुनाव में करीब 74 विधायकों का टिकट काट दिया है। इसके अलावा लगभग 15 उम्मीदवारों का चुनाव क्षेत्र बदल दिया गया है। इससे ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी कमजोर हो सकती है। 

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को मात देने के लिए भाजपा को इन सभी समीकरणों पर मजबूत जवाब खोजना होगा जिससे वह इस राज्य में सत्ता तक अपनी पहुंच बना सके। फिलहाल, भाजपा ममता बनर्जी को घेरने के लिए अवैध घुसपैठ, अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार का मुद्दा ही उठा रही है। लेकिन नई परिस्थितियों में उसे अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।

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