चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चुनाव प्रचार के दौरान घायल होने पर तृणमूल कांग्रेस के ज्ञापन का जवाब देते हुए गुरुवार को कड़े शब्दों में पत्र लिखा है। आयोग ने लिखा कि इन आरोपों पर जवाब देना भी अशोभनीय लगता है कि आयोग एक दल विशेष के कहने पर राज्य में काम कर रहा है।
चुनाव आयोग ने कहा कि शुरुआत में कहना होगा कि नंदीग्राम में बनर्जी को चोट लगना वास्तव में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और इसकी पूरी तरह जांच होनी चाहिए। पत्र में आयोग ने लिखा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि कथित ज्ञापन आक्षेपों और कठोर बयानों से भरा हुआ है, जो चुनाव आयोग के गठन और कामकाज के आधार पर ही सवाल खड़े करता है।
राज्य की कानून व्यवस्था हमारे हाथ में नहीं
चुनाव आयोग ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि चुनाव आयोग ने राज्य में चुनाव कराने के नाम पर कानून व्यवस्था अपने हाथ में ले ली है। चुनाव आयोग ने कहा कि यह एक तरह से भारतीय संविधान की बुनियाद को ही कमजोर करने के समान है जो लोकतांत्रिक शासनतंत्र का सबसे पवित्र दस्तावेज है। पश्चिम बंगाल समेत किसी राज्य के दिन-प्रतिदिन के शासन को आयोग अपने हाथ में नहीं लेता है।
पुलिस निदेशक को बिना सोचे-समझे नहीं हटाया गया
चुनाव आयोग ने कहा कि पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक को बिना सोचे-समझे नहीं हटाया गया है। आयोग ने कहा कि यह विशेष पर्यवेक्षक अजय नायक और विवेक दुबे की सिफारिशों के परिणाम स्वरूप किया गया है।
तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने लगाया था चुनाव आयोग पर आरोप
बता दें कि इससे पहले तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा था कि बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति अच्छी थी, लेकिन चुनावों की घोषणा के बाद कानून-व्यवस्था निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी बन गई।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग ने राज्य पुलिस के डीजीपी को हटा दिया और अगले ही दिन उन पर(बनर्जी) हमला हो गया। निर्वाचन आयोग ने वीरेंद्र को पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक पद से तत्काल प्रभाव से हटाने का मंगलवार को आदेश दिया था और उनकी जगह पी नीरजनयन को नियुक्त किया था। वहीं अब चुनाव आयोग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।