पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अपने राज्य में सीबीआई के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। राजनीतिक गलियारे में इसको लेकर चर्चा तेज हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि जो कुछ छिपाना चाहते हैं, वही सीबीआई को रोक रहे हैं। इसके जवाब में भाजपा के एक बड़े नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि सीबीआई तो एक बहाना है। असली मकसद नेताओं के भीतर बैठे सीबीआई के डर को भगाना है।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद का कहना है कि पिछले साढ़े चार साल में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने सीबीआई को कुछ छिपाने लायक भी नहीं छोड़ा। मोदी सरकार के कार्यकाल में सीबीआई भाजपा और आरएसएस का पोलिटिकल विंग बनकर रह गई है। हरिप्रसाद ने कहा कि सीबीआई की जो साख बनी थी, उसे भाजपा की केन्द्र सरकार ने चौपट कर दिया है।
सीबीआई का डर भगाना है
भाजपा के नेता सीबीआई पर इस तरह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों के नेता अपने पुराने कारनामें से डर रहे हैं। अरुण जेटली ने भी यही बयान देकर चंद्र बाबू नायडू और ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। दरअसल राष्ट्रीय जनता दल के लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले में जेल में हैं। कांग्रेस के पूर्व महासचिव और वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पहले ही कांग्रेस और बसपा का म.प्र. में गठबंधन न बन पाने के लिए सीबीआई के दुरुपयोग को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। बीके हरिप्रसाद भी यही कह रहे हैं। हरिप्रसाद के अनुसार विरोधियों को परेशान करने के लिए बदले की भावना से मौजूदा सरकार सीबीआई को इस्तेमाल कर रही थी। माना जा रहा है कि चंद्र बाबू नायडू और ममता बनर्जी ने इसी दिशा में सीबीआई का डर भगाने के लिए यह कदम उठाया है।
सीबीआई प्रकरण से धूमिल हुई सरकार की छवि
केन्द्रीय जांच एजेंसी में दो शीर्ष अफसरों में मची रार, आरोप-प्रत्यारोप और एक अफसर के प्रति सरकार के नरम रुख ने प्रधानमंत्री मोदी की छवि को काफी नुकसान पहुंचाया। सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा का सरकार के जबरिया छुट्टी पर भेजने के फैसले के खिलाफ अदालत में जाने से केन्द्र सरकार की छवि को गहरा झटका लगा है। कांग्रेस पार्टी समेत अन्य दलों ने इसको लेकर केन्द्र सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया। दरअसल गुजरात कॉडर के सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की भूमिका को लेकर पहले भी आरोप लगते रहे। राकेश अस्थाना प्रधानमंत्री के भी चहेते अफसर माने जाते हैं। इसके बाद से ही राजनीतिक दलों का भी हौसला बढ़ गया है।
मायावती ने अपनाया पुराना तेवर
मायावती ने कांग्रेस और भाजपा को क्रमश: नागनाथ और सांपनाथ पार्टी बताया है। बसपा सुप्रीमों ने काफी समय बाद अपने पुराने फार्म में वापसी की है। पिछले कुछ समय से वह भाजपा पर इस तरह का करारा हमला बोलने से बच रही थी। मायावती के इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज है। कांग्रेस पार्टी के महागठबंधन की संभावना पर काम कर रहे सूत्रों का कहना है कि काफी समय से मोदी सरकार कई राजनीतिक दलों के नेताओं सीबीआई का डर दिखाकर उनके राजनीतिक कामकाज में हस्तक्षेप करती रही है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता राज्यों में कांग्रेस का गठबंधन न हो पाने और राष्ट्रीय स्तर पर महागठबंधन की रुपरेखा को लेकर आई ठंडक का कारण भी यही मानते हैं। इन नेताओं को लग रहा है कि अब धीरे-धीरे सीबीआई का यह दुष्प्रभाव कम होगा।